Prayagraj Magh Mela
Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज के पावन माघ मेले में श्रद्धा और भक्ति के संगम के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्राधिकरण के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी जी को एक और कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उनके मेले में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है। प्राधिकरण का आरोप है कि स्वामी जी के कार्यक्रमों और उनके समर्थकों के आचरण से मेले की व्यवस्था और सुरक्षा में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने किसी का नाम लिए बिना सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक सच्चे योगी, संत या संन्यासी के लिए व्यक्तिगत संपत्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता; उसका धर्म ही उसकी असली पूंजी है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र और धर्म को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जो लोग धर्म की आड़ लेकर सनातन परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, वे ‘कालनेमि’ के समान हैं। उन्होंने जनता और संतों को ऐसे छद्म वेशधारी लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी।
दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण के दूसरे नोटिस का औपचारिक जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि पालकी से चलना कोई दिखावा नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य के काल से चली आ रही 2500 साल पुरानी सनातन परंपरा का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे प्रोटोकॉल के नाम पर शंकराचार्य पद की गरिमा और मर्यादा को भंग कर रहे हैं। स्वामी जी के अनुसार, प्रशासन जानबूझकर धार्मिक रीति-रिवाजों में बाधा उत्पन्न कर रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन और पुलिस पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके जवाब में दावा किया गया है कि पुलिस ने उनके अनुयायियों के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि पालकी को घसीटकर उनका अपमान भी किया। उन्होंने इसे “सार्वजनिक उपहास” करार देते हुए कहा कि अपराधियों जैसा व्यवहार एक धार्मिक प्रमुख के साथ करना निंदनीय है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि पालकी को जानबूझकर नदी के किनारे एक खतरनाक मोड़ पर ले जाया गया ताकि वह गिर जाए। स्वामी जी ने इसे उनकी हत्या की साजिश और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं पर सीधा प्रहार बताया है।
मेला प्रशासन द्वारा शिविर के भूमि आवंटन को रद्द करने और शिविर हटाने की धमकियों पर शंकराचार्य ने बेबाकी से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के पास केवल “बुलडोजर” की शक्ति है, यदि वे चाहें तो उनके शिविर पर बुलडोजर चलवा दें। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “हम तो वैसे भी फुटपाथ पर आ गए हैं, वहीं से सरकार की कार्रवाई को देखेंगे।” उन्होंने अन्य संतों द्वारा उनके खिलाफ दिए जा रहे बयानों को ‘सत्ता प्रायोजित’ बताते हुए कहा कि जो संत उनके विरुद्ध बोल रहे हैं, वे वास्तव में बीजेपी के कार्यकर्ता के रूप में निर्देशानुसार कार्य कर रहे हैं।
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