Premanand Maharaj : उत्तर प्रदेश के वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। एक निजी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें वे आधुनिक युवाओं और खासतौर पर लड़कियों की पवित्रता को लेकर आपत्तिजनक बातें करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वे कहते हैं कि आज के समय में “100 में मुश्किल से 2-4 लड़कियां ही पवित्र होती हैं, बाकी सभी बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के चक्कर में पड़ी होती हैं।”
प्रेमानंद महाराज ने इस वायरल वीडियो में आधुनिक युवाओं के रिश्तों और नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई युवक चार लड़कियों से संबंध बनाता है, तो वह अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रह सकता। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी ही स्थिति उस लड़की की होती है जो एक से अधिक पुरुषों के संपर्क में रही हो—वह एक पति को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाती। उनके अनुसार, केवल वही लड़की पवित्र कहलाने योग्य है जो एक पुरुष के प्रति समर्पित जीवन जीती है।
प्रेमानंद महाराज के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे “महिलाओं के सम्मान के खिलाफ” और “पुरातनपंथी सोच” बताया है। कई महिला संगठनों ने भी बयान पर आपत्ति जताई है और इसे समाज में महिलाओं के प्रति नकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा देने वाला करार दिया है। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हजारों यूज़र्स ने संत की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जहाँ प्रेमानंद महाराज को उनके प्रवचनों के लिए बड़ी संख्या में अनुयायी मानते हैं, वहीं इस तरह के बयान ने उनके समर्थकों में भी असमंजस और नाराजगी पैदा कर दी है। कई लोगों ने कहा कि धार्मिक नेताओं से संयमित और समावेशी भाषा की अपेक्षा की जाती है। महिलाओं को इस तरह के जनरलाइज किए गए कथनों में बांधना न केवल अनुचित है बल्कि समाज की मानसिकता को भी दूषित करता है।
गौरतलब है कि इससे पहले यूपी के ही एक अन्य प्रसिद्ध संत अनिरुद्धाचार्य महाराज भी महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयानों के चलते चर्चा में रहे थे। उनके बयान पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया था और देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। आखिरकार उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी थी। अब प्रेमानंद महाराज का मामला सामने आने से एक बार फिर धार्मिक मंचों से महिलाओं पर की जा रही टिप्पणियों की गंभीरता पर बहस छिड़ गई है।
प्रेमानंद महाराज के विवादित बयान ने न सिर्फ उनकी छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि धार्मिक व्यक्तित्वों की जिम्मेदारी और समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। अब देखना होगा कि क्या प्रशासन या महिला आयोग इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करता है।
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