Gandhi Jayanti 2025: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम दशहरा के पावन अवसर से पहले आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने देश के प्रति अपने निष्ठा और अहिंसा के मार्गदर्शक महात्मा गांधी के आदर्शों को याद किया। मोदी जी का यह कदम गांधी जी की विरासत को सम्मान देने और समाज में उनके सिद्धांतों को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर वे गांधी जी के जीवन और उनके द्वारा दिखाए गए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प भी दोहराए। राजघाट पहुंचकर मोदी ने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा, “महात्मा गांधी की शिक्षाएं हमें सत्य, अहिंसा और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाती हैं। उनका जीवन हमें देश सेवा और समाज की भलाई के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। हम सभी को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना होगा।”
प्रधानमंत्री मोदी आज शाम दिल्ली में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। दशहरा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, पूरे देश में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष के दशहरा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ जाएगी।
दशहरा पर्व के महत्व पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “दशहरा हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंततः अच्छाई की जीत होती है। यह त्योहार हमें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
महात्मा गांधी और दशहरा दोनों ही भारत की सांस्कृतिक और नैतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। गांधी जी ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त किया। दशहरा भी इसी तरह बुराई के खिलाफ अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संदेशों में हमेशा गांधी जी के सिद्धांतों का उल्लेख किया है और उन्हें आधुनिक भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना है कि गांधी जी की विचारधारा को अपनाकर ही देश में स्थिरता, समरसता और विकास संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दिन गांधी जी को श्रद्धांजलि देने से लेकर दशहरा कार्यक्रम में भाग लेने तक की यात्रा, भारतीय राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक धरोहर का एक जीवंत उदाहरण है। यह दर्शाता है कि भारत का नेतृत्व अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखते हुए देश के विकास के लिए काम कर रहा है।इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक नेताओं, नागरिकों और युवाओं ने भी मोदी के इस कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि गांधी जी की शिक्षाएं और दशहरा का त्योहार युवाओं में नैतिकता, सहिष्णुता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव जागृत करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महात्मा गांधी को राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करना और दशहरा के कार्यक्रम में हिस्सा लेना, देश के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल गांधी जी की यादों को सम्मानित करता है, बल्कि पूरे राष्ट्र को एकता, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।
दशहरा का त्योहार और गांधी जी की शिक्षाएं दोनों ही भारत को एक मजबूत, समृद्ध और शांतिपूर्ण राष्ट्र बनाने में सहायक हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल देशवासियों के लिए भी एक संदेश है कि वे अपने इतिहास और परंपराओं को समझें और उनका पालन करें।
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