Priya Saroj paddy farming : उत्तर प्रदेश के मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की नव-निर्वाचित सांसद प्रिया सरोज का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे पानी से भरे खेत में धान की रोपाई करती नजर आ रही हैं। महिला किसानों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए खेत में मेहनत करतीं प्रिया की ये सादगी लोगों को खूब भा रही है।
प्रिया सरोज अपने लोकसभा क्षेत्र के करखियांव गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने महिलाओं के साथ धान की रोपाई करते हुए संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को समाजवादी पार्टी की नीतियों और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी किस तरह से गांव, गरीब और किसान की आवाज को संसद तक पहुंचाने का काम कर रही है।
तस्वीरों और वीडियो में प्रिया सरोज नंगे पांव, साड़ी पहने हुए और हाथ में धान के पौधे लिए हुए खेत में काम करती नजर आती हैं। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया है। कई यूज़र्स ने लिखा कि “ऐसी सांसद देखकर भरोसा होता है कि राजनीति अब ज़मीन से जुड़ रही है।” उनकी सादगी और आत्मीयता को जमकर सराहा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, प्रिया सरोज की सगाई के साथी और भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। वजह बनी है उनकी बेसिक शिक्षा अधिकारी पद पर कथित नियुक्ति की खबर। लोगों ने सवाल उठाए कि जिस पद के लिए पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है, वहां दसवीं पास भी नहीं होने वाले रिंकू सिंह को किस आधार पर चुना गया?
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस फैसले को योग्यता के मापदंडों की अनदेखी बताया है। कई शिक्षकों और छात्रों ने भी नाराजगी जताई है। विपक्षी नेताओं ने भी योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि “खेल प्रतिभा का सम्मान जरूरी है, लेकिन शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति के लिए योग्यता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की सगाई लखनऊ में बड़े समारोह के साथ हुई थी, जिसमें अखिलेश यादव और डिंपल यादव जैसे नेता भी शामिल हुए थे। हालांकि, रिंकू सिंह के क्रिकेट कार्यक्रमों और प्रिया सरोज की राजनीतिक व्यस्तताओं के चलते, इनकी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी गई है।
जहां प्रिया सरोज किसानों के साथ खेत में उतरकर एक जनप्रतिनिधि के ज़मीनी जुड़ाव की मिसाल बन रही हैं, वहीं रिंकू सिंह एक सरकारी पद की खबर को लेकर विवादों में हैं। एक ओर जनता सादगी और जनसंपर्क की सराहना कर रही है, वहीं दूसरी ओर योग्यता आधारित पदों पर नियुक्तियों को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है।
समाजवादी पार्टी की रणनीति स्पष्ट दिख रही है — जमीनी मुद्दों से जुड़ाव और पिछड़े-वंचित वर्गों को मजबूत प्रतिनिधित्व। वहीं, सत्ता पक्ष को अब रिंकू सिंह की नियुक्ति जैसे फैसलों पर स्पष्टता और पारदर्शिता के साथ सामने आना होगा।
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