Priyanka Gandhi Remark: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के बीच उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने भाषण के दौरान बिना नाम लिए नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर टिप्पणी की। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसके बाद संसद परिसर में हुए उनके स्वागत का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। इसी दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंपी है, जिनसे जुड़ा एक पुराना विवाद सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है।

शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर सरकार पर साधा निशाना
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों के बीच सरकार को ऐसा निर्णय लेना चाहिए था, जिससे छात्रों और देश के युवाओं का विश्वास मजबूत होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं दिख रही हैं। उनका बयान ऐसे समय आया, जब सदन में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से लाए गए संशोधन विधेयक पर विस्तृत चर्चा चल रही थी।

बयान के बाद सदन में शुरू हुआ हंगामा
प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। लोकसभा में कुछ समय के लिए जोरदार हंगामा देखने को मिला। कई सांसद अपनी सीटों से उठकर विरोध जताने लगे। इस दौरान सदन का माहौल काफी गरमा गया और चर्चा कुछ समय के लिए बाधित होती दिखाई दी। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कांग्रेस सांसद की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए इसे रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
स्पीकर ने तथ्यों के साथ बोलने की दी सलाह
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रियंका गांधी से कहा कि सदन में किसी भी विषय पर बोलते समय तथ्यों का ध्यान रखना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि चर्चा केवल उस विधेयक तक सीमित रखी जाए, जो सदन के एजेंडे में शामिल है। अध्यक्ष ने संसदीय मर्यादा बनाए रखने और विषय से भटकने से बचने की भी अपील की।
किरेन रिजिजू ने माफी की मांग उठाई
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्री के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है और इसे चरित्र हनन की श्रेणी में देखा जा सकता है। रिजिजू ने कहा कि यदि लगाए गए आरोपों के समर्थन में तथ्य उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित टिप्पणी वापस ली जानी चाहिए और माफी मांगी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि विवादित बयान को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए।
भाजपा सांसदों ने भी दर्ज कराया विरोध
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि संसद में किसी भी व्यक्ति के बारे में आरोप लगाने से पहले उसके समर्थन में प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए तथ्यों पर आधारित चर्चा आवश्यक है और बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप उचित नहीं माने जा सकते।
कांग्रेस ने दिया अपना पक्ष
विवाद के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अतीत में भी संसद के भीतर कई नेताओं के बारे में विवादित टिप्पणियां हुई हैं, जिन्हें कार्यवाही से नहीं हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में अभिव्यक्ति के दौरान सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया गया कि संसदीय परंपराओं का पालन सभी दलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
प्रह्लाद जोशी ने आरोपों का किया खंडन
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सदन में स्पष्ट कहा कि उनसे संबंधित जो दावा किया जा रहा है, वह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। वहीं, प्रियंका गांधी ने अपने दावे के समर्थन में एक समाचार पत्र की कटिंग सदन में दिखाते हुए सवाल उठाया कि क्या प्रकाशित सामग्री से भी इनकार किया जा रहा है।
अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद विधेयक पर लौटी चर्चा
विवाद बढ़ता देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोबारा हस्तक्षेप किया और सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे केवल लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा करें। इसके बाद सदन में बहस फिर विधेयक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित हुई। प्रियंका गांधी ने अपने आगे के संबोधन में छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।
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