Punjab Assembly Resolution : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच पंजाब विधानसभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। शुक्रवार को पारित इस सरकारी प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई। प्रस्ताव में मतदाता सूचियों की निष्पक्षता और नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया गया। इससे पहले केरल विधानसभा भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इस घटनाक्रम ने चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में पेश किया प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा के सत्र के दूसरे दिन राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह प्रस्ताव सदन में रखा। इस पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कथित वोट चोरी को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। मान ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत देशभर में लगभग 14 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री का दावा है। मतदाता सूची में बदलाव और हटाए गए नामों से संबंधित वास्तविक स्थिति का आकलन आधिकारिक निर्वाचन आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में मतदान के अधिकार की सुरक्षा पर जोर
पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है। किसी योग्य मतदाता को गैरकानूनी तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित करना संवैधानिक लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सदन ने सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रस्ताव के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। इसमें मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और नागरिकों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर देने की मांग भी की गई।
ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग
प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय व्यवस्था बनाने की मांग की गई। इसका उद्देश्य संबंधित आरोपों की सच्चाई सामने लाना और जिम्मेदारी तय करना बताया गया। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कानूनों के उल्लंघन के ठोस सबूत मिलते हैं, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, प्रस्ताव पारित होना अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
बीजेपी पर हरपाल सिंह चीमा ने लगाए गंभीर आरोप
प्रस्ताव पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा पर गरीब और कमजोर वर्गों के मतदान अधिकारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले वर्ष हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भाजपा वोट चोरी के जरिए सत्ता में आई थी। ये आरोप आम आदमी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। चुनावों में कथित अनियमितताओं से जुड़े दावों का निष्पक्ष आकलन करने के लिए संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक आंकड़ों और सक्षम संस्थाओं के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
आम आदमी पार्टी विधायक ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी की विधायक इंदरजीत कौर मान ने भी भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने मतदान की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता जताते हुए चुनाव केवल मतपत्रों यानी बैलेट पेपर के माध्यम से कराने की मांग की। इस मांग के साथ चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के विश्वास का मुद्दा भी चर्चा में आया। पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव और केरल विधानसभा के पहले के कदम से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। अब इस मुद्दे पर आगे होने वाली राजनीतिक और संस्थागत गतिविधियों पर नजर रहेगी।
Read More : Abhijeet Dipke : नेपाल-बांग्लादेश जैसी स्थिति पर अभिजीत दीपके का जवाब, भारत की विरासत का किया जिक्र