Punjab SIR : तीन दशक से अधिक समय तक भारतीय विदेश सेवा में रहकर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी इन दिनों पंजाब में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चर्चा में हैं। सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उनके दस्तावेजों से जुड़ी कुछ जानकारियां वर्ष 2003 के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस स्थिति के बाद उनसे भारतीय नागरिकता साबित करने वाले अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए।
वोटर आईडी और आधार जमा करने के बाद भी मांगे दस्तावेज
नवदीप सूरी के मुताबिक, उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास जाकर अपना वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड जमा किया था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि प्रक्रिया सामान्य रूप से पूरी हो जाएगी। हालांकि, बाद में एक वॉलंटियर के जरिए उन्हें जानकारी मिली कि उनकी कुछ जानकारियां वर्ष 2003 के SIR रिकॉर्ड से मैच नहीं कर रही हैं। इसके बाद उनसे ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, जिनसे उनकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो सके।
2003 में भारत में नहीं थे नवदीप सूरी
पूर्व राजनयिक ने बताया कि वर्ष 2003 में वह भारत में मौजूद नहीं थे। ऐसे में संबंधित प्रक्रिया के तहत उनसे उस अवधि से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मांगे गए। उन्होंने बताया कि सबूत के तौर पर अपना पासपोर्ट देने को कहा गया। सूरी मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि जब विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके व्यक्ति को भी नागरिकता संबंधी दस्तावेज साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम मतदाता के सामने किस तरह की मुश्किलें आ सकती हैं।
आम मतदाताओं को लेकर भी उठे सवाल
सूरी के अनुभव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आम लोगों के सामने आने वाली संभावित परेशानियों को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, उनके मामले पर चुनाव आयोग, पंजाब सरकार या केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उनके रिकॉर्ड में किस तरह का अंतर पाया गया और उसका अंतिम समाधान क्या होगा।
सोमनाथ भारती ने भी जताई चिंता
इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने भी मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि 1997 में IIT दिल्ली से स्नातक करने और बाद में दिल्ली में कानून की पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें वर्ष 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला। भारती ने उन दावों पर भी चिंता जताई, जिनमें SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका व्यक्त की गई थी।
पंजाब की सभी 117 सीटों पर जारी है प्रक्रिया
पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा के अनुसार, राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों के लिए 2026 की ड्राफ्ट मतदाता सूची SIR के तहत प्रकाशित की जा चुकी है। यह प्रक्रिया भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है।
12 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंजाब में 13 अगस्त से 12 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद नोटिस और सत्यापन की प्रक्रिया चलेगी तथा 8 अक्टूबर तक दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है।
करीब 1.94 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म हुए जमा
अधिकारियों के मुताबिक पंजाब में कुल करीब 2.14 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.94 करोड़ लोगों के एन्यूमरेशन फॉर्म एकत्र किए जा चुके हैं। इन फॉर्मों को प्रक्रिया के दौरान डिजिटाइज भी किया गया। वहीं 20 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट यानी ASDD श्रेणी में रखा गया है। घर-घर जाकर एन्यूमरेशन की प्रक्रिया 25 जून से 3 अगस्त के बीच पूरी की गई।
SIR प्रक्रिया में दस्तावेजों की भूमिका अहम
नवदीप सूरी का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पंजाब में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में है। उनके अनुभव ने दस्तावेजों के सत्यापन और पुराने रिकॉर्ड से जानकारी मिलान की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक स्थिति और अंतिम जांच का इंतजार करना जरूरी होगा। फिलहाल SIR प्रक्रिया जारी है और मतदाताओं के पास अपने रिकॉर्ड से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मौजूद है।
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