Puri Jagannath Temple : ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की आर्थिक स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने महाप्रभु जगन्नाथ की जमा पूंजी और संपत्ति से संबंधित वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। प्रशासन के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक मंदिर के विभिन्न बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में कुल करीब 1,912 करोड़ रुपये जमा हैं। मंदिर प्रशासन ने वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और श्रद्धालुओं तथा आम लोगों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से यह जानकारी साझा की है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज्यादा रकम जमा
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मंदिर की बड़ी रकम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखी गई है। इन एफडी में कुल 1,811 करोड़ 9 लाख 58 हजार रुपये जमा हैं। इस रकम में मंदिर के अलग-अलग फंड शामिल हैं, जिनमें कॉर्पस फंड, फाउंडेशन फंड और टेम्पल डिपॉजिट प्रमुख हैं।
सरकार के 500 करोड़ रुपये के कॉर्पस फंड का भी हिस्सा
मंदिर की एफडी में ओडिशा सरकार की ओर से जून 2024 में उपलब्ध कराया गया 500 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी शामिल है। यह राशि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। कॉर्पस फंड के अलावा अन्य जमा रकम भी मंदिर की दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी होती है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर की आर्थिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है।
बचत और चालू खातों में भी करोड़ों रुपये
फिक्स्ड डिपॉजिट के अतिरिक्त मंदिर प्रशासन के पास अलग-अलग बचत, चालू और फ्लेक्सी बैंक खातों में भी बड़ी रकम मौजूद है। इन खातों में करीब 100 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक राशि जमा बताई गई है। इस धनराशि का इस्तेमाल मंदिर की नियमित जरूरतों, धार्मिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है। इस तरह मंदिर की कुल जमा पूंजी करीब 1,912 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचती है।
मंदिर की कमाई के कई प्रमुख स्रोत
श्री जगन्नाथ मंदिर की आय केवल श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे तक सीमित नहीं है। SJTA के अनुसार, मंदिर की आमदनी के कई स्रोत हैं। इनमें भक्तों की ओर से दिया जाने वाला दान, चढ़ावा, मंदिर के स्वामित्व वाली जमीन और खदानों से प्राप्त आय, एफडी पर मिलने वाला ब्याज, जमीन से जुड़े सौदों से प्राप्त धनराशि और सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान शामिल हैं।
हुंडी में आने वाले चढ़ावे की रोजाना होती है गिनती
मंदिर प्रशासन ने दान और चढ़ावे की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी जानकारी दी है। मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी के अनुसार, मंदिर की हुंडी यानी दानपात्र में जमा होने वाली राशि की प्रतिदिन गिनती की जाती है। गिनती पूरी होने के बाद प्राप्त रकम की जानकारी आधिकारिक सूचना बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित की जाती है। इससे श्रद्धालुओं को मंदिर की दैनिक आय के बारे में जानकारी मिलती रहती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराई जाती है जानकारी
मंदिर प्रशासन का कहना है कि दान की राशि से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने का उद्देश्य वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है। मंदिर परिसर में लगे आधिकारिक सूचना बोर्ड के साथ डिजिटल माध्यमों पर भी आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु मंदिर की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों में होता है फंड
मंदिर को प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल महाप्रभु जगन्नाथ की दैनिक पूजा-अर्चना, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर की व्यवस्थाओं को संचालित करने में किया जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर के रखरखाव और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी फंड खर्च किया जाता है। धार्मिक परंपराओं को सुचारु बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सेवायतों और कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी मंदिर की वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा होते हैं।
अतिरिक्त धनराशि को एफडी में किया जाता है जमा
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, नियमित धार्मिक और प्रशासनिक खर्चों के बाद बचने वाली अतिरिक्त राशि को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। ऐसी अतिरिक्त रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट में परिवर्तित कर दिया जाता है। इससे मंदिर को भविष्य की आवश्यकताओं के लिए वित्तीय सुरक्षा मिलती है और जमा धन पर ब्याज भी प्राप्त होता रहता है।
पारदर्शिता से मजबूत होगा श्रद्धालुओं का भरोसा
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक किए जाने को पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब 1,912 करोड़ रुपये की जमा राशि मंदिर की मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाती है। साथ ही, दान की रोजाना गिनती और उसकी जानकारी सार्वजनिक करने से श्रद्धालुओं को मंदिर की आय और धन के इस्तेमाल के बारे में अधिक स्पष्टता मिलती है। प्रशासन का जोर धार्मिक परंपराओं के साथ वित्तीय प्रबंधन को भी व्यवस्थित और पारदर्शी बनाए रखने पर है।
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