Russia Ukraine war : रूस और यूक्रेन के बीच करीब ढाई साल से चल रहा युद्ध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। रॉयटर्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार संकेत दिया है कि वे युद्ध खत्म करने को तैयार हैं। हालांकि इसके लिए उन्होंने यूक्रेन के सामने तीन कड़ी शर्तें रखी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने शांति वार्ता के लिए जो शर्तें रखी हैं, वे इस प्रकार हैं –पूर्वी डोनबास क्षेत्र खाली करना: यूक्रेन को डोनबास पूरी तरह छोड़ना होगा। यह वही इलाका है जिस पर रूस ने 2014 से कब्ज़े की कोशिश की थी और जिसे लेकर लगातार संघर्ष जारी है।
नाटो सदस्यता का त्याग: यूक्रेन को साफ़ तौर पर यह वादा करना होगा कि वह भविष्य में नाटो (NATO) का हिस्सा नहीं बनेगा।तटस्थ रुख और पश्चिमी सैनिकों की रोक: यूक्रेन को खुद को तटस्थ राष्ट्र घोषित करना होगा और अपने देश में किसी भी पश्चिमी सेना की तैनाती नहीं होने देनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान युद्धविराम की दिशा में पहला बड़ा संकेत हो सकता है। हालांकि, पुतिन की ये शर्तें यूक्रेन और उसके सहयोगियों के लिए स्वीकार करना आसान नहीं होगा। कीव लंबे समय से कहता रहा है कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा।
डोनबास, पूर्वी यूक्रेन का औद्योगिक इलाका है। यहां की आबादी का एक हिस्सा रूसी मूल का है और लंबे समय से अलगाववाद की मांग करता रहा है। रूस 2014 से इस क्षेत्र में दखल दे रहा है और इसी मुद्दे ने 2022 में छिड़े बड़े युद्ध की नींव रखी थी। यदि यूक्रेन इसे छोड़ देता है, तो यह रूस की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत मानी जाएगी।
रूस हमेशा से यूक्रेन की नाटो में शामिल होने की कोशिश का विरोध करता रहा है। पुतिन का तर्क है कि अगर नाटो सेना यूक्रेन की जमीन पर तैनात हो जाती है, तो रूस की सुरक्षा को सीधा खतरा होगा। यही कारण है कि नाटो विस्तार रूस-यूक्रेन संघर्ष का अहम कारण माना जाता है।
अमेरिका और यूरोपीय देश लगातार यूक्रेन को हथियार और आर्थिक मदद दे रहे हैं। पश्चिमी राष्ट्रों का कहना है कि रूस की आक्रामकता को रोकना जरूरी है, अन्यथा यह खतरा यूरोप तक फैल सकता है। ऐसे में पुतिन की “पश्चिमी सैनिकों को रोकने” वाली शर्त पर सहमति बनना मुश्किल है।
अब सबकी निगाहें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर टिकी हैं। वे पहले ही कह चुके हैं कि वे रूस के कब्जे वाले किसी भी इलाके से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं, यूक्रेन की संसद ने नाटो सदस्यता को अपने दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया है। ऐसे में पुतिन की शर्तों पर सहमति बनना असंभव लग रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए पुतिन का यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। लेकिन डोनबास छोड़ने और नाटो से दूरी बनाने जैसी शर्तें यूक्रेन के लिए बेहद कठिन हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश कूटनीति का रास्ता अपनाते हैं या युद्ध और लंबा खिंचता है।
Read More : Rahul Gandhi का आरोप: चुनावों में ‘वोट चोरी’, संविधान पर हो रहा हमला
Sankalp Hospital Ambikapur : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई…
Mamata Banerjee Resignation : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने राज्य की…
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार, 5 मई 2026 को इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के दूसरे…
Bengal Violence Prevention : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद राज्य…
Cabinet Decisions 2026 : देश के कृषि परिदृश्य को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्रीय…
Sabarimala Temple Case : सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहे ऐतिहासिक…
This website uses cookies.