UPI Controversy : UPI पेमेंट पर शुल्क को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। सरकार की ओर से 14 सितंबर की अधिसूचना में ₹2,000 तक के UPI और RuPay लेनदेन पर जीरो-चार्ज व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का रास्ता खोला गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने UPI पर लगाया बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि अब ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लगाया जा सकता है। राहुल के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही कुल UPI ट्रांजैक्शन का लगभग पांच प्रतिशत हो, लेकिन इनका कुल लेनदेन मूल्य में हिस्सा करीब 65 प्रतिशत है।
राहुल बोले दुकानदार पर शुल्क का असर ग्राहक पर पड़ेगा
राहुल गांधी ने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया कि UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि दुकानदारों पर शुल्क लगाया जाता है तो उसका बोझ किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक, व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं, जिससे अंततः आम उपभोक्ता की जेब प्रभावित होगी।
अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में अमेरिकी पेमेंट कंपनियों का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका की पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अब केंद्र सरकार उसी दिशा में बदलाव का रास्ता तैयार कर रही है। राहुल ने इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाया और सरकार पर समझौता करने का आरोप लगाया।
अमित मालवीय ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत
राहुल गांधी के आरोपों के बाद बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के दावे को गलत बताते हुए कहा कि ऐसा कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है, जिसमें ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क या टैक्स निर्धारित किया गया हो। मालवीय ने कहा कि 14 सितंबर की अधिसूचना का उद्देश्य केवल ₹2,000 तक के UPI और RuPay लेनदेन के लिए जीरो-चार्ज सुरक्षा को स्पष्ट करना है।
₹2,000 से ज्यादा UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क तय नहीं
अमित मालवीय ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत चार्ज फिलहाल निर्धारित नहीं किया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर अधिसूचना की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में UPI यूजर्स से किसी तरह का प्रत्यक्ष शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इस तरह उन्होंने कांग्रेस के उस दावे को खारिज किया, जिसमें 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की बात कही गई थी।
P2P UPI लेनदेन अभी भी पूरी तरह मुफ्त
मालवीय ने यह भी कहा कि पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P UPI लेनदेन किसी भी राशि पर मुफ्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम UPI उपयोगकर्ताओं पर किसी प्रकार का नया शुल्क नहीं लगाया गया है। उनके अनुसार, यदि भविष्य में MDR व्यवस्था लागू की जाती है तो वह केवल कुछ सीमित मर्चेंट लेनदेन तक हो सकती है और उसका सीधा शुल्क ग्राहक से लेने का प्रावधान नहीं बताया गया है।
UPI शुल्क विवाद पर आमने-सामने कांग्रेस और बीजेपी
इस पूरे मामले में कांग्रेस और बीजेपी के दावों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इसे UPI पर संभावित शुल्क व्यवस्था की शुरुआत बताते हुए सरकार को घेर रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का कोई सरकारी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में UPI शुल्क का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन सकता है।
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