TMC Symbol Row : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न पर निर्वाचन आयोग के अंतरिम फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस से जुड़े मामलों में एक जैसी प्रक्रिया देखने को मिल रही है।
राहुल ने लगाया पार्टी तोड़ने और चुनाव चिह्न छीनने का आरोप
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि पार्टियों में विभाजन कराने वाली ताकतों के साथ चुनाव आयोग भी जुड़ जाता है और उसके बाद पार्टी का चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों से जोड़ते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल की पहचान को लेकर ऐसा विवाद पैदा हो सकता है, तो चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी चिंता होना स्वाभाविक है। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं।
‘वोट चोरी और पार्टी चोरी’ को लेकर राहुल का बयान
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और ‘पार्टी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। राहुल गांधी ने कहा कि जनता के जनादेश की सुरक्षा करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि यह मामला केवल ममता बनर्जी से जुड़ा नहीं है, बल्कि उन राजनीतिक दलों और मतदाताओं से भी संबंधित है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं।
चुनाव आयोग ने TMC नाम और चिह्न पर लगाया अंतरिम रोक
निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर को जारी अंतरिम आदेश में तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नाम और उसके आरक्षित ‘Flowers & Grass’ यानी ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के संदर्भ में लागू की गई है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव निर्धारित हैं।
ममता और दूसरे गुट को अलग नाम-चिह्न चुनने का निर्देश
आयोग के अनुसार TMC से जुड़े दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे गुट को लेकर आयोग ने अपने आदेश में अरूप रॉय के नेतृत्व का उल्लेख किया है। दोनों गुटों को निर्देश दिया गया कि वे उपचुनाव के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन पार्टी नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्न आयोग को दें। इसके बाद प्रत्येक गुट को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा।
चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम व्यवस्था अंतिम निर्णय नहीं है। आयोग के मुताबिक दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हैं, इसलिए पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर ठोस निर्णय की आवश्यकता है। इस विवाद पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत आगे की प्रक्रिया होगी।
उपचुनाव से पहले बदली TMC की चुनावी पहचान
आयोग के अंतरिम आदेश के बाद नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में दोनों गुट मूल TMC नाम और आरक्षित ‘जोड़ा फूल’ चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दोनों पक्षों को चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित उपलब्ध चुनाव चिह्नों में से अलग-अलग प्रतीक चुनने होंगे। इससे इन उपचुनावों में दोनों गुटों की चुनावी पहचान फिलहाल अलग रहेगी।
TMC विवाद पर आगे के फैसले पर नजर
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम निर्णय अभी चुनाव आयोग के सामने लंबित है। अंतरिम आदेश का उद्देश्य दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को उपचुनाव के दौरान समान स्थिति में रखना और उनके अधिकारों व हितों की रक्षा करना बताया गया है। इस बीच राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा चुनावी विवाद के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है।
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