Rahul Gandhi
Rahul Gandhi Challenge: किसान महा-चौपाल को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और लोकसभा की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पहला अधिकार होता है, लेकिन देश के इतिहास में पहली बार उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया। राहुल ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का संदर्भ देना शुरू किया, सत्ता पक्ष की ओर से व्यवधान पैदा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बोलते ही प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री की ओर इशारा किया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
राहुल गांधी ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे की पुस्तक का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि जब चीन के टैंक भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे थे, तब सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को फोन किया था, लेकिन किसी ने भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया। राहुल के अनुसार, सेना प्रमुख प्रधानमंत्री के आदेश का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अंततः उन्हें अपने विवेक से निर्णय लेने को कह दिया गया। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि जब देश की सुरक्षा के लिए कड़े आदेश देने का समय आया, तो प्रधानमंत्री ‘गायब’ हो गए और सेना को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच रुके हुए एक बड़े व्यापारिक समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सोया, कपास और मक्का जैसे उत्पादों को लेकर अमेरिका की बड़ी कंपनियों के साथ यह डील पिछले चार महीनों से रुकी हुई थी क्योंकि भारत का किसान नहीं चाहता था कि विदेशी कंपनियां यहां बाजार पर कब्जा करें। राहुल का आरोप है कि संसद में उनके भाषण के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री ने बिना कैबिनेट की सलाह लिए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और डील साइन करने की सहमति दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस फैसले से पहले कृषि मंत्री या किसानों की राय ली गई थी?
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर विदेशी दबाव में झुकने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदुस्तान के किसानों के हितों का सौदा कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि भारत का महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। राहुल ने इस त्वरित फैसले के पीछे ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र करते हुए एक विवादित थ्योरी साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास मौजूद फाइलों के जरिए भारत को धमकाया जा रहा है और इसी दबाव के कारण प्रधानमंत्री ने जल्दबाजी में कृषि सौदे पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि रातों-रात किसानों के हितों को किनारे रख दिया गया।
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उद्योगपतियों के साथ संबंधों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री का अनिल अंबानी से क्या रिश्ता है और इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने गौतम अडानी का नाम लेते हुए कहा कि ‘अडानी’ केवल एक कंपनी नहीं है, बल्कि यह मौजूदा सरकार का वित्तीय ढांचा (Finance Structure) है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल चुनिंदा मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जबकि आम किसान और जवान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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