Rahul Gandhi Citizenship
Rahul Gandhi Citizenship : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी के लिए कानूनी मोर्चे पर शनिवार को एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई। दोहरी नागरिकता के विवाद को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के अपने ही पिछले आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रस्तावित आरोपी के विरुद्ध बिना उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिए या बिना नोटिस जारी किए इस तरह का आदेश पारित करना प्रक्रियात्मक रूप से सही नहीं है। इस फैसले के बाद राहुल गांधी की गिरफ्तारी या तत्काल पुलिसिया कार्रवाई की संभावनाएं फिलहाल टल गई हैं।
यह पूरा मामला कर्नाटक के निवासी एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता छिपाने और भारतीय पासपोर्ट नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। शिशिर ने अपनी याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA), विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। शुक्रवार को प्रारंभिक सुनवाई के दौरान जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने इन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए न केवल एफआईआर का आदेश दिया था, बल्कि मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की बात भी कही थी।
शनिवार को इस मामले में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने आदेश को औपचारिक रूप से टाइप होने और जारी होने से पहले उसकी विधिक स्थिति का पुनरीक्षण किया। गहन अध्ययन के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि साल 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी। उस निर्णय के अनुसार, यदि किसी एफआईआर की मांग वाली अर्जी को खारिज किया जाता है, तो उसके विरुद्ध पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) ही मान्य होती है। साथ ही, ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उसे अदालत द्वारा नोटिस जारी करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने अपनी गलती सुधारते हुए माना कि राहुल गांधी को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के सीधे एफआईआर का सामना करने के लिए कहना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रस्तावित आरोपी को सुने बिना फैसला करना विधिक रूप से उचित नहीं होगा। इसी आधार पर जस्टिस विद्यार्थी ने अपने पिछले मौखिक आदेश को प्रभावी होने से रोक दिया। यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों से जुड़े संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करना कितना आवश्यक है।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है। कोर्ट उस दिन याचिका की पोषणीयता और नोटिस की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार करेगा। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने इस अदालती रोक का स्वागत किया है और इसे सच्चाई की जीत बताया है। वहीं, याचिकाकर्ता का पक्ष अब राहुल गांधी को औपचारिक नोटिस भेजने की तैयारी में है। आगामी सुनवाई में यह तय होगा कि क्या दोहरी नागरिकता के इन आरोपों में इतनी मजबूती है कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच शुरू की जा सके या फिर यह याचिका कानूनी खामियों के कारण खारिज कर दी जाएगी।
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