Rahul Gandhi Manusmriti Row : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं के अधिकार और सामाजिक बराबरी की बात कही थी। उनके बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के बयान को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाए हैं।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को उनके बयान से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी फिरोज गांधी के वंशज हैं और भारतीय संविधान तथा धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में उनकी पारसी पृष्ठभूमि है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सनातन धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म के धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
धार्मिक पहचान को लेकर उठाए गए सवाल
निशिकांत दुबे के बयान में राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को उनके सार्वजनिक और राजनीतिक वक्तव्यों के साथ जोड़कर सवाल खड़े किए गए। हालांकि, किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान और किसी धर्म या उसके धार्मिक ग्रंथ पर सार्वजनिक टिप्पणी करने का अधिकार दो अलग-अलग विषय हैं। किसी व्यक्ति के धर्म के आधार पर उसके विचार व्यक्त करने के अधिकार को स्वतः सीमित नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि इस विवाद में राजनीतिक बयानबाजी के साथ संवैधानिक और सार्वजनिक विमर्श भी चर्चा में है।
सीएम योगी ने भी राहुल गांधी को घेरा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी पर देश की बेटियों को भड़काने और युवाओं को भ्रमित करने का आरोप लगाया। योगी ने कहा कि भारतीय परंपरा में मनुस्मृति के कुछ पहलुओं और काल गणना से जुड़े योगदान को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को जिम्मेदारी से बयान देने और अपनी विरासत का सम्मान करने की सलाह दी।
मनु की काल गणना का किया जिक्र
सीएम योगी ने अपने बयान में मनु और काल गणना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज उपलब्ध काल गणना की परंपरा में मनु का योगदान माना जाता है। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि यह विरासत उनके परिवार के किसी सदस्य की देन नहीं है। योगी ने कहा कि कोई व्यक्ति मनुस्मृति को स्वीकार करे या अस्वीकार, यह उसका व्यक्तिगत विषय हो सकता है, लेकिन यदि उसकी आलोचना की जा रही है तो उसके सकारात्मक पहलुओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।
पुणे में राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति का उल्लेख किया था। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों पर बात करते हुए कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं को किसी की संपत्ति नहीं माना गया है और वे स्वयं की हैं। राहुल गांधी ने युवतियों से सामाजिक बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।
युवाओं से संवाद पर राहुल गांधी का जोर
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और छात्राएं मौजूद थीं। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य सीधे तौर पर राजनीतिक भाषण देना नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों को समझना और शिक्षा व्यवस्था में मौजूद भेदभाव तथा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संवाद करना है। उन्होंने युवाओं से अपने सवाल खुलकर रखने और सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा करने की अपील की।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक तकरार
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं से विवाद और गहरा गया है। एक ओर राहुल गांधी सामाजिक बराबरी, महिलाओं के अधिकार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता उनके मनुस्मृति संबंधी बयान को लेकर उनके विचारों और धार्मिक टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
मनुस्मृति विवाद ने फिर पकड़ा तूल
मनुस्मृति को लेकर भारत की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग विचार रहे हैं। इसके सामाजिक प्रावधानों और ऐतिहासिक भूमिका को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। राहुल गांधी के हालिया बयान ने इसी पुराने विमर्श को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे को आगे किस तरह उठाते हैं।
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