Membership Termination
Membership Termination : संसद के वर्तमान सत्र में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय संसदीय लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की मर्यादा और नियमों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार राहुल गांधी के खिलाफ फिलहाल ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ (Privilege Motion) लाने के मूड में नहीं है। सरकार ने अपनी रणनीति बदलते हुए राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को सदन की कार्यवाही से हटाने (Expunge) का निर्णय लिया है, जिन्हें ‘विवादास्पद’ माना जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि राहुल गांधी ने सदन में जो आरोप लगाए, उन्हें प्रमाणित (Authenticate) करने के लिए आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की औपचारिक मांग भी की है।
एक तरफ जहां सरकार नरम रुख अपनाती दिख रही है, वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लोकसभा में एक अत्यंत कड़ा मोशन पेश किया है, जिसमें राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी ‘जॉर्ज सोरोस’ जैसी बाहरी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रिविलेज मोशन नहीं, बल्कि उन्हें संसद से सस्पेंड करने के लिए एक ‘जरूरी मोशन’ है।
जिस समय राहुल गांधी सदन में बोल रहे थे, उस दौरान आसन पर आसीन भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी उनकी भाषा पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी को अपने शब्दों की मर्यादा का ज्ञान होना चाहिए। पाल ने सवाल उठाया कि क्या संसदीय लोकतंत्र में इस तरह की भाषा और निराधार आरोपों का स्थान होना चाहिए? उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष के नेता का पद एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिसका निर्वहन पूरी गंभीरता से किया जाना चाहिए।
सदन में पैदा हुए इस गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में सदन की वर्तमान स्थिति और विपक्षी हमलों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि सरकार अब आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर, लोकसभा में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के मात्र सात मिनट के भीतर ही स्थगित करनी पड़ी।
सदन की बैठक शुरू होते ही पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के करीब पहुंच गए। इस शोर-शराबे के बीच केवल एक पूरक प्रश्न पूछा जा सका, जिसका जवाब ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने दिया। बार-बार की अपील के बावजूद जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो सदन को स्थगित करना पड़ा।इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राहुल गांधी के बयानों और सरकार की जवाबी कार्रवाई को लेकर संसद में तकरार और बढ़ सकती है।
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