Rahul Gandhi Speech Expunged
Rahul Gandhi Speech Expunged: बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बजट पर चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी के संबोधन में इस्तेमाल किए गए कई शब्दों और आरोपों को लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा (Expunged) दिया गया है। संसद सचिवालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कुल 8 प्रमुख शब्दों और वाक्यांशों को रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनाया गया है। इनमें ‘देश बिक चुका है’, ‘बिकाऊ’, ‘एपस्टीन’, और ‘अनिल अंबानी’ जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री पर की गई उन टिप्पणियों को भी हटा दिया गया है जिनमें 1.5 अरब लोगों का भविष्य बेचने की बात कही गई थी।
राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि केंद्र सरकार ने इस व्यापार समझौते के जरिए भारत के हितों को अमेरिका के सामने गिरवी रख दिया है। उन्होंने इसे ‘थोक स्तर पर किया गया आत्मसमर्पण’ करार देते हुए कहा कि यह केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के ‘फाइनेंशियल स्ट्रक्चर’ की सुरक्षा के लिए पूरे देश का सौदा कर लिया है। उन्होंने भावुक होते हुए यहाँ तक कह दिया कि सरकार को भारत माता का सौदा करते हुए शर्म आनी चाहिए, हालांकि उनके इन कड़े शब्दों को स्पीकर के आदेश के बाद रिकॉर्ड से बाहर कर दिया गया।
ट्रेड डील की तकनीकी खामियों पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत का बेशकीमती डेटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। उन्होंने डेटा लोकलाइजेशन की जरूरत खत्म करने, फ्री डेटा फ्लो की अनुमति देने और विदेशी कंपनियों को 20 साल की टैक्स छूट देने जैसे प्रावधानों पर सवाल उठाए। राहुल ने चेतावनी दी कि अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी अमेरिका के नियंत्रण में होगी और वाशिंगटन तय करेगा कि नई दिल्ली को रूस से तेल खरीदना चाहिए या नहीं। उन्होंने डिजिटल टैक्स और टैरिफ की विसंगतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ जीरो कर दिया, जबकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कृषि क्षेत्र पर इस डील के प्रतिकूल प्रभावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी मशीनीकृत खेती के लिए भारत के दरवाजे खोलकर सरकार ने देश के गरीब किसानों को कुचलने का इंतजाम कर दिया है। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर आज ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, और इस समझौते ने अमेरिका को वह ‘हथियार’ भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की पूरी अनुमति दे दी है।
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर ही तीखा प्रहार किया। उन्होंने 2009 के शर्म अल-शेख साझा बयान की याद दिलाते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ नरमी बरतने की बात कही थी। वित्त मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, “हमें समझौता सिखाने वाले लोग खुद बेचने वाले हैं।” उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू के बयान का समर्थन करते हुए जोर देकर कहा कि भारत को बेचने वाला कोई ‘माई का लाल’ पैदा नहीं हुआ है।
संसद में हुई इस बहस ने साफ कर दिया है कि आगामी दिनों में भारत-अमेरिका ट्रेड डील एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। विपक्ष जहाँ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़ रहा है, वहीं सरकार इसे आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है। फिलहाल, लोकसभा के रिकॉर्ड से शब्दों का हटाया जाना इस बात का प्रमाण है कि संसद के भीतर दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई है।
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