IPS Suicide Probe: कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को हरियाणा के दिवंगत IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारी की कथित आत्महत्या को “व्यवस्थित जातिगत भेदभाव” का नतीजा बताया और हरियाणा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

परिवार से मिलकर जताई संवेदना

राहुल गांधी सुबह करीब 11 बजे चंडीगढ़ स्थित वाई पूरन कुमार के आवास पहुंचे। उन्होंने शोक-संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा, “यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों दलितों के लिए एक खतरनाक संदेश है।”
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा, “अगर आप दलित हैं, तो आप कितने भी योग्य या सफल क्यों न हों, आपको कुचला जा सकता है।” उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने तीन दिन पहले निष्पक्ष जांच का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा, “यह नाटक बंद होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री सैनी को मैं स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं – दोषियों पर कार्रवाई करें और इस परिवार को न्याय दें।”
दलित अधिकारी की मौत ने उठाए गंभीर सवाल
IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या ने प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई से जमे जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न को उजागर कर दिया है। कुमार ने अपने आठ पन्नों के ‘फाइनल नोट’ में हरियाणा पुलिस के कई शीर्ष अधिकारियों पर जाति-आधारित उत्पीड़न, अपमान और करियर बर्बाद करने की साजिश का आरोप लगाया है। इन अधिकारियों में तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर (जो अब छुट्टी पर भेजे जा चुके हैं) और रोहतक के तत्कालीन एसपी नरेंद्र बिजारनिया सहित आठ वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
पोस्टमार्टम पर बना गतिरोध
कुमार के परिजन पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की अनुमति देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे सरकार और परिवार के बीच गतिरोध जारी है। परिवार का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। यह मामला सात दिनों से अटका हुआ है, जिससे राज्य सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष का दबाव बढ़ा
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने हरियाणा सरकार को घेरा है और इसे दलित उत्पीड़न और संस्थागत जातिवाद का एक और उदाहरण बताया है। राहुल गांधी की यह मुलाकात विपक्ष की ओर से पीड़ित परिवार को समर्थन देने की एक बड़ी राजनीतिक पहल मानी जा रही है।
IPS वाई पूरन कुमार की मौत एक प्रशासनिक अधिकारी की नहीं, बल्कि एक दलित आवाज की चुप्पी है, जिसने संस्थागत जातिवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। राहुल गांधी के दौरे ने इस मामले को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया है। अब निगाहें सरकार की कार्रवाई पर हैं कि क्या वह वादों से आगे बढ़कर वास्तविक न्याय सुनिश्चित कर पाएगी।











