Kerala Elections 2026
Kerala Elections 2026: केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता वापसी के लिए कांग्रेस ने अभी से बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। लगभग दो घंटे तक चली इस चर्चा में केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन किया गया। पार्टी ने इस बार ‘मिशन 100+’ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। नेतृत्व का मानना है कि पिछले चुनाव की गलतियों को सुधारकर और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत कर वामपंथी मोर्चे (LDF) को सत्ता से बाहर किया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक पंडितों को चर्चा का नया मुद्दा दे दिया है। जब दिल्ली में चुनावी रणनीति बन रही थी, तब थरूर कोझिकोड में आयोजित ‘केरल लिटरेचर फेस्टिवल’ में व्यस्त थे। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक सूत्रों ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि थरूर ने अपनी पूर्व व्यस्तताओं के बारे में आलाकमान को पहले ही सूचित कर दिया था। इसके बावजूद, राज्य की राजनीति में इसे उनकी कथित ‘नाराजगी’ से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि वे पिछले कुछ समय से केरल इकाई में अपनी उपेक्षा को लेकर मुखर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर लंबे समय से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने का समय मांग रहे हैं। खबर है कि बजट सत्र के दौरान कांग्रेस के ये दोनों शीर्ष नेता थरूर के साथ अलग से बैठक करेंगे। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के भीतर थरूर की भूमिका और उनके असंतोष को दूर करना होगा। थरूर का मानना रहा है कि उन्हें राज्य के स्थानीय सांगठनिक मामलों में वह महत्व नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। ऐसे में आगामी सत्र में होने वाली यह चर्चा केरल कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को तय करने में अहम साबित होगी।
शशि थरूर और पार्टी आलाकमान के बीच के संबंध अक्सर चर्चा में रहते हैं। थरूर कई मौकों पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर बयानबाजी कर चुके हैं। चाहे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुछ फैसलों की तारीफ हो या मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के प्रति नरम रुख, थरूर के बयानों ने कई बार पार्टी को असहज किया है। हालांकि, दिल्ली की बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि आलाकमान फिलहाल इन बातों से ज्यादा चिंतित नहीं है। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन ने नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ाया है, जिससे उन्हें लगता है कि सामूहिक प्रयास से जीत सुनिश्चित की जा सकती है।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने केरल के नेताओं को गुटबाजी से ऊपर उठने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आपसी मतभेद भुलाकर चुनाव लड़ा जाए, तो केरल में कांग्रेस की सरकार बनना तय है। राहुल गांधी ने यह भी साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री पद के चेहरे का फैसला अभी नहीं, बल्कि चुनाव के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया से किया जाएगा। रणनीति के तहत, राज्य में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन एक बड़ी राज्यव्यापी यात्रा निकालेंगे, जो जनता के बीच जाकर वामपंथी सरकार की विफलताओं को उजागर करेगी।
केरल की राजनीति में दशकों से हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज रहा है, जिसे 2021 में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने दोबारा जीतकर तोड़ दिया था। कांग्रेस के लिए 2026 का चुनाव अपनी साख बचाने की लड़ाई है। मुस्लिम लीग और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर कांग्रेस इस बार एक मजबूत मोर्चा बनाने की कोशिश में है। वहीं, भाजपा की बढ़ती सक्रियता ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का संकेत दिया है। ऐसे में कांग्रेस के लिए थरूर जैसे प्रभावशाली नेताओं को साथ लेकर चलना और जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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