Rahul Gandhi on UPI Tax : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को UPI के नए शुल्क ढांचे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से UPI पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की अपील की। राहुल गांधी ने इस व्यवस्था को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताया और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।
राहुल गांधी ने UPI शुल्क को बताया ‘टैक्स’
राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने UPI पर शुल्क लगाकर देश के आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने का रास्ता खोला है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अमेरिकी दबाव के सामने झुकने के बजाय मजबूती से खड़े होने और UPI शुल्क वापस लेने की अपील की। उनके ये आरोप कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं।
इंदिरा गांधी के पुराने बयान का राहुल ने किया जिक्र
अपने वीडियो में राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी से जब पूछा गया था कि वह राजनीतिक रूप से लेफ्ट या राइट की ओर झुकती हैं, तो उन्होंने खुद को दोनों में से किसी एक दिशा में झुका हुआ नहीं बताया था। राहुल ने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर अपनी राजनीतिक टिप्पणी की।
सरकार ने कहा, UPI पर सीधे कोई टैक्स नहीं
UPI शुल्क को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए प्रावधान को UPI टैक्स के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, Merchant Discount Rate यानी MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। यह भुगतान इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच साझा किया जाता है।
₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान रहेंगे मुफ्त
सरकार के अनुसार, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए लागू जीरो-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले लेन-देन भी मुफ्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि नए ढांचे के बावजूद लगभग 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी तक होने वाले UPI लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे।
₹2,000 से ऊपर P2M भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम MDR ₹300 तय किया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान किसी भी राशि के लिए मुफ्त रहेगा।
जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क व्यवस्था
सरकार ने कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग MDR व्यवस्था रखी है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित भुगतान पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य आवश्यक सेवाओं और छोटे मार्जिन वाले कारोबारों पर अधिक लागत का दबाव रोकना है।
कांग्रेस ने फैसले पर जताई आपत्ति
कांग्रेस ने नए UPI शुल्क ढांचे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का तर्क है कि व्यापारी पर लगने वाला MDR भविष्य में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच सकता है। राहुल गांधी ने भी इसी आशंका का हवाला देते हुए सरकार से शुल्क व्यवस्था वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा और UPI का बड़ा हिस्सा पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
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