Women Reservation Bill
Women Reservation Bill : महिला आरक्षण विधेयक पर मतदान से ठीक पहले लोकसभा का माहौल उस समय गर्मा गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। राहुल गांधी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक की आड़ में असल मुद्दों को छिपाना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जाति जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने से डरती है और इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को दबाने की कोशिश कर रही है। राहुल ने जोर देकर कहा कि बिना सामाजिक भागीदारी और जातिगत आंकड़ों के, महिलाओं का सशक्तिकरण अधूरा रहेगा।
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देने के लिए जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे खड़े हुए, तो उन्होंने बेहद आक्रामक और तंजिया अंदाज अपनाया। दुबे ने राहुल गांधी के संबोधन की शैली पर कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं कल रात डेढ़ बजे तक सदन में मौजूद था और आज जब नेता प्रतिपक्ष बोलने आए, तो मुझे लगा कि वे देश की माताओं-बहनों की समस्याओं पर कुछ ठोस बोलेंगे। लेकिन उनका भाषण सुनकर ऐसा लगा जैसे मैंने माइकल जैक्सन का कोई डांस देख लिया हो।” उन्होंने राहुल की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए उनके तथ्यों को भी कटघरे में खड़ा किया।
राहुल गांधी द्वारा अक्सर उद्योगपतियों और सत्ता के गठजोड़ पर दिए जाने वाले बयानों का जवाब देते हुए निशिकांत दुबे ने कुछ बड़े नाम गिनाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बुनियादी जानकारी का अभाव है। दुबे ने तर्क दिया कि टाटा परिवार, जो देश का सबसे बड़ा बिजनेस घराना है, वह अल्पसंख्यक समुदाय से आता है। वहीं, वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल भी ओबीसी (OBC) समाज से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि सरकार किसी जाति विशेष का पक्ष नहीं लेती और देश का आर्थिक ढांचा विविधतापूर्ण है।
चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जब निशिकांत दुबे को टोकते हुए इतिहास के पन्ने न पलटने की सलाह दी, तो बहस और तेज हो गई। अखिलेश ने कहा कि सदन में विवाद नहीं, बल्कि संवाद होना चाहिए। इस पर दुबे ने श्लोक पढ़कर अपनी बात रखी। इसी बीच अखिलेश यादव ने कन्नौज की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनके मंदिर जाने के बाद उसे गंगाजल से धुलवाया गया। निशिकांत दुबे ने इस पर सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि जिसने भी ऐसा किया वह गलत है और दोषी को कानूनी सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि भेदभाव की भारतीय समाज में कोई जगह नहीं है।
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि आज जातिगत जनगणना की मांग करने वाले लोग ही अतीत में इसके सबसे बड़े विरोधी थे। उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी ने स्वयं कहा था कि जातिगत जनगणना संविधान के दायरे में नहीं आती। दुबे ने पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के पुराने बयानों का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि जातिगत जनगणना देश की एकता को खंडित कर सकती है और समाज को बांट देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक फायदे के लिए अपना स्टैंड बदल रही है।
लोकसभा में हुई यह बहस केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आगामी चुनावों के एजेंडे को भी स्पष्ट कर दिया। जहाँ विपक्ष जाति जनगणना को केंद्र में रखकर पिछड़ों और दलितों को साधने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड को जनता के सामने रखकर उन्हें ‘दोहरे मानदंड’ अपनाने वाला बता रहा है। इन तमाम नोकझोंक के बीच महिला आरक्षण बिल के प्रावधानों और इसके भविष्य के क्रियान्वयन को लेकर सदन में सरगर्मी बनी रही।
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