Chhattisgarh
Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस वर्ष गर्मी का मौसम पूरी तरह शुरू होने से पहले ही यहाँ के जंगलों में दावानल (Forest Fire) की डराने वाली घटनाएं सामने आने लगी हैं। शनिवार को रायगढ़ के खरसिया वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले परेवा पहाड़ के जंगलों में भीषण आग लग गई। दूर-दूर से उठती आग की लपटों और धुएं के गुबार ने स्थानीय निवासियों और वन विभाग को चिंता में डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग ने बहुत ही कम समय में जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बहुमूल्य वनस्पतियों और वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
घटना की शुरुआत शनिवार दोपहर बाद हुई। जानकारी के मुताबिक, जब राहगीर और स्थानीय ग्रामीण कुनकुनी ओवरब्रिज के पास से गुजर रहे थे, तब उनकी नजर परेवा पहाड़ के जंगलों से उठती लपटों पर पड़ी। पहाड़ पर आग फैलती देख ग्रामीणों ने बिना देरी किए इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन परिक्षेत्राधिकारी और उनकी टीम सक्रिय हो गई। बताया जा रहा है कि यह आग खरसिया सर्किल के बसनाझर बीट के कक्ष क्रमांक 1192 आरएफ (आरक्षित वन) क्षेत्र में लगी थी।
जैसे ही वन अमला मौके पर पहुँचा, आग बुझाने का युद्धस्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दमकल वाहनों का पहुँचना मुश्किल था, इसलिए वनकर्मियों ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया। वन विभाग की टीम ने ‘ब्लोअर मशीन’ की सहायता से सूखी पत्तियों को हटाकर ‘फायर लाइन’ काटने का काम किया, ताकि आग जंगल के दूसरे हिस्सों में न फैल सके। वन अमले के दर्जनों कर्मचारी आग की लपटों पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करते देखे गए। विभाग का मुख्य उद्देश्य आग को रिहायशी इलाकों और घने वन्यजीव क्षेत्रों की ओर बढ़ने से रोकना था।
चिंताजनक बात यह है कि खरसिया रेंज में दावानल की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले बीते 17 फरवरी को भी इसी वन परिक्षेत्र में आग लगने की खबर आई थी। एक ही सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने अब गश्त बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि अक्सर महुआ बीनने वाले या असामाजिक तत्व जंगल की जमीन साफ करने के लिए आग लगा देते हैं जो बाद में विकराल रूप धारण कर लेती है।
अभी मार्च का महीना भी शुरू नहीं हुआ है और तापमान बहुत अधिक नहीं बढ़ा है, फिर भी जंगलों में आग लगना पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है। आमतौर पर रायगढ़ और तमनार रेंज में अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में आग लगती है, लेकिन फरवरी में ही ऐसी घटनाएं पिछले वर्ष के विनाशकारी दावानल की याद दिला रही हैं। रायगढ़ वन मंडल अब उन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग कर रहा है जहाँ आग लगने की सबसे अधिक संभावना रहती है, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
खरसिया सर्किल प्रभारी विजय दीक्षित ने बताया कि दोपहर में सूचना मिलते ही फायर फाइटिंग टीम को रवाना कर दिया गया था। उन्होंने राहत जताते हुए कहा कि चूंकि अभी गर्मी का प्रकोप बहुत अधिक नहीं है, इसलिए आग की गति धीमी है और इसे नियंत्रित करना आसान है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जनभागीदारी जरूरी है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएं और आग दिखने पर तुरंत सूचित करें।
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