Raipur Central Jail Death
Raipur Central Jail Death: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी सुनील महानंद ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मृतक के परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार शाम करीब 6:45 बजे की है। 30 वर्षीय सुनील महानंद जेल परिसर में टहल रहा था, तभी वह अचानक वहां लगे एक पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। सुनील ने अपने पास रखे गमछे का फंदा बनाया और पेड़ की टहनी से लटक गया। वहां तैनात सुरक्षा प्रहरियों ने जैसे ही उसे देखा, तुरंत उसे नीचे उतारा। उस वक्त सुनील की सांसें चल रही थीं। उसे आनन-फानन में मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई है, जो स्पष्ट रूप से आत्महत्या की ओर इशारा करती है।
सुनील के परिजनों ने जेल प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, सुनील पिछले दो महीनों से लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहा था। परिजनों का कहना है कि जब भी वे सुनील से मिलने जेल जाते थे, वह अपनी तकलीफ बयां करता था। आरोप है कि परिजनों द्वारा दिए गए कपड़े, स्वेटर और खाने-पीने का सामान जेल के भीतर छीन लिया जाता था। यहाँ तक कि परिजनों ने उसके खर्च के लिए पेटीएम के माध्यम से जो पैसे भेजे थे, वे भी उसे नहीं दिए गए। परिजनों का दावा है कि जेल के भीतर एक संगठित तरीके से कैदियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
घटना के बाद परिजनों का गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्हें पता चला कि सुनील का शव बिना उन्हें सूचना दिए अस्पताल और फिर मॉर्चुरी भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन ने इस मामले को दबाने की कोशिश की और उन्हें बहुत देर से जानकारी दी। यदि समय पर सूचना मिलती, तो शायद वे अस्पताल में सुनील को आखिरी बार देख पाते। इस “गोपनीयता” ने जेल प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा कर दिया है, जिसके कारण गंज थाना क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है।
सुनील की मौत की खबर फैलते ही उसकी पत्नी ललिता महानंद बेसुध हो गई। जेल के बाहर बड़ी संख्या में समाज के लोग और कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि दोषी जेल अधिकारियों और जेलर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
बढ़ते दबाव को देखते हुए जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर लिया है और शव का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन जेल के भीतर मानवाधिकारों के उल्लंघन के इन आरोपों ने एक नई बहस छेड़ दी है।
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