Raipur News
Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विकास कार्यों को लेकर नगर निगम प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। शहीद हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड से कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर ने अपनी मांगों को लेकर नगर निगम मुख्यालय में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह कदम उन्होंने अपने वार्ड की एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण के लिए फंड जारी न होने के विरोध में उठाया है। पार्षद का आरोप है कि प्रशासन जनता की बुनियादी समस्याओं को दरकिनार कर रहा है।
पार्षद शेख मुशीर ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे पिछले 11 महीनों से लगातार नगर निगम के अधिकारियों और संबंधित विभागों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी मांग मात्र 11 लाख रुपये की स्वीकृति को लेकर है, जो उनके वार्ड की जर्जर सड़क की मरम्मत के लिए बेहद जरूरी है। मुशीर का कहना है कि इतने महीनों के इंतजार के बाद भी उन्हें हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। एक जन प्रतिनिधि को अपने ही वार्ड के विकास के लिए इस तरह संघर्ष करते देख निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पार्षद ने बताया कि वार्ड की सड़क की स्थिति वर्तमान में इतनी दयनीय हो चुकी है कि वहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण आए-दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं और छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह सिर्फ डामरीकरण का मामला नहीं है, बल्कि वार्ड के हजारों नागरिकों की जान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसके बावजूद निगम प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
शेख मुशीर ने अपने विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए ऐलान किया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने निर्णय लिया है कि जब तक मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए 11 लाख रुपये की राशि आधिकारिक तौर पर स्वीकृत नहीं हो जाती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। वे प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक गांधी प्रतिमा के चरणों में बैठकर सत्याग्रह करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, उनका यह लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।
इस धरने को समर्थन देने के लिए नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सत्ता पक्ष और निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रायपुर नगर निगम आर्थिक और प्रशासनिक रूप से पंगु हो चुका है। तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि जिस निगम में एक पार्षद को मात्र 11 लाख रुपये के काम के लिए 11 महीने तक भटकना पड़े, वहां बड़े विकास कार्यों की कल्पना करना ही व्यर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण शहर की बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं।
रायपुर नगर निगम में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल ड्रामा शहर के अन्य वार्डों की स्थिति को भी उजागर करता है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल एक वार्ड की कहानी नहीं है, बल्कि शहर के कई हिस्सों में बजट के अभाव या प्रशासनिक सुस्ती के कारण काम रुके हुए हैं। पार्षद शेख मुशीर के इस धरने ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। यदि समय रहते फंड जारी नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में नगर निगम को शहर के अन्य पार्षदों के भी भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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