Raipur Cyber Crime
Raipur Cyber Crime : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से साइबर क्राइम का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने तकनीकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां शातिर अपराधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग करते हुए एक प्रतिष्ठित वकील को अपनी ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की। आरोपियों ने आधुनिक तकनीक की मदद से पीड़ित वकील का एक फर्जी अश्लील (न्यूड) वीडियो तैयार किया। इस ‘डीपफेक’ वीडियो का इस्तेमाल वकील को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उन्हें समाज में पूरी तरह बदनाम करने के लिए एक हथियार के रूप में किया गया था।
इस पूरे गिरोह की साजिश बेहद सोची-समझी थी। आरोपियों ने पीड़ित वकील को अपने जाल में फंसाने के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। उन्होंने वकील को फोन कर सीधे तौर पर धमकी दी कि यदि उन्होंने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो इस अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इस बदनामी और सामाजिक प्रतिष्ठा को धूल में मिलाने के एवज में आरोपियों ने वकील से ₹50,000 की मोटी रकम की मांग की थी। अपराधी इस फिराक में थे कि बदनामी के डर से पीड़ित तुरंत पैसे दे देगा।
सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, यह पूरी घटना 20 मई 2026 की शाम को शुरू हुई। शाम के करीब 5:27 बजे शिकायतकर्ता वकील के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से मिस्ड कॉल आया। जब वकील ने शिष्टाचार के नाते उस नंबर पर वापस कॉल (कॉल बैक) किया, तो दूसरी तरफ से बात कर रहे शख्स ने उन्हें एक वीडियो भेजने की बात कही। इसके कुछ ही पलों बाद, एक दूसरे अनजान मोबाइल नंबर से वकील के व्हाट्सएप पर वह आपत्तिजनक और एडिटेड अश्लील वीडियो भेजा गया, जिसे देखकर वकील के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वीडियो भेजने के तुरंत बाद आरोपियों ने पीड़ित को दोबारा कॉल किया। इस बार उनका लहजा बेहद आक्रामक और डराने वाला था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर 50 हजार रुपए तुरंत ट्रांसफर नहीं किए गए, तो यह वीडियो उनके दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। वकील को समझ आ गया कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड और ब्लैकमेलिंग रैकेट के चंगुल में फंस चुके हैं। उन्होंने बिना डरे अपराधियों के सामने झुकने के बजाय कानून का रास्ता चुनने का साहसिक फैसला किया।
अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर लगते देख पीड़ित वकील ने तुरंत रायपुर के सिविल लाइन थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। चूंकि मामला एआई (AI) तकनीक के गलत इस्तेमाल और एक वकील की प्रतिष्ठा से जुड़ा था, इसलिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तुरंत साइबर सेल और सिविल लाइन पुलिस की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल नंबरों की लोकेशन के आधार पर आरोपियों को घेरना शुरू कर दिया।
पुलिस की मुस्तैद टीम ने चौबीस घंटे के भीतर त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मामले में संलिप्त एक नाबालिग कानूनगो (विधि से संघर्षरत बालक) सहित कुल 6 आरोपियों को धर-दबोचा। गिरफ्तार किए गए बालिग आरोपियों की पहचान तामेश्वर सोनवानी, राजकुमार कुर्रे, कोमल यादव, छोटू टंडन और सैय्यद अली के रूप में हुई है। पुलिसिया पूछताछ में सभी आरोपियों ने एआई वीडियो भेजकर पैसे ऐंठने की बात कबूल कर ली है। फिलहाल सिविल लाइन पुलिस इन सभी के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर रही है।
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