Raipur Call Center Raid
Raipur Call Center Raid : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने एक ऐसे हाई-टेक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो सात समंदर पार अमेरिका और चीन के नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बना रहा था। गुजरात के दो शातिर ठगों ने रायपुर को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया और यहाँ के प्रतिष्ठित इलाकों में बाकायदा ऑफिस खोलकर विदेशी नागरिकों को करोड़ों का चूना लगाना शुरू किया। 26 मार्च को रायपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गंज और राजेंद्र नगर थाना क्षेत्रों से 42 युवकों को हिरासत में लिया है। हालांकि, इस पूरे खेल के असली खिलाड़ी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश में टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में इस पूरे सिंडिकेट के पीछे अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा के नाम सामने आए हैं। इन दोनों ने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में बाकायदा ऑफिस किराए पर ले रखे थे। इसके अलावा, उन्होंने अपने ठहरने और मीटिंग्स के लिए ‘पाम बेलागियो’ में एक लग्जरी फ्लैट भी रेंट पर लिया था। ये मास्टरमाइंड खुद रायपुर में स्थायी रूप से नहीं रहते थे; वे समय-समय पर आकर अपने मैनेजरों को टारगेट और निर्देश देते थे और फिर वापस गुजरात लौट जाते थे। टेलीग्राम और डार्क वेब के जरिए विदेशी नागरिकों का डेटा जुटाकर यह पूरा गिरोह काम कर रहा था।
पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह गिरोह भारतीय समय के अनुसार रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सबसे ज्यादा सक्रिय रहता था। इसका कारण यह था कि जब भारत में रात होती है, तब अमेरिका में दिन का समय होता है। आरोपियों के पास वॉट्सऐप के माध्यम से उन अमेरिकी नागरिकों का पूरा डेटा होता था, जिन्होंने वहां के चार बड़े बैंकों से लोन लिया हुआ था। वे उन्हें कॉल कर सिबिल स्कोर (CIBIL) खराब होने या किस्तों के बकाया होने का डर दिखाते थे। जैसे ही पीड़ित घबराता, ये ठग उनके खातों की जानकारी लेकर चाइनीज ऐप्स के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर पार कर देते थे।
इस गिरोह की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसमें काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी केवल 12वीं पास थे और उन्हें अंग्रेजी का ठीक से ज्ञान भी नहीं था। पुलिस को जांच में पता चला कि इन युवाओं को दो महीने की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें कागज पर हिंदी में लिखकर दिया जाता था कि अंग्रेजी में क्या और कैसे बोलना है। कर्मचारी उसी स्क्रिप्ट को पढ़कर अमेरिकी नागरिकों से बात करते थे। अगर कोई विदेशी नागरिक तकनीकी सवाल पूछता, तो कॉल तुरंत सीनियर को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इन युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी पर रखा गया था।
पुलिस ने इस कॉल सेंटर गिरोह के तीन मुख्य प्रभारियों—रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव को गिरफ्तार किया है। रोहित और सौरभ पिथालिया कॉम्प्लेक्स के मैनेजर थे, जबकि गौरव अंजनी टावर के सेंटर का इंचार्ज था। इन प्रभारियों को करीब 30 हजार रुपये महीना वेतन दिया जाता था। वहीं, कॉल करने वाले युवाओं को 15 से 20 हजार रुपये मिलते थे। ठगी की सफलता पर इन्हें अतिरिक्त कमीशन का लालच भी दिया जाता था। पुलिस ने मौके से दर्जनों कंप्यूटर, मोबाइल फोन और विदेशी नागरिकों के डेटा वाली फाइलें बरामद की हैं।
रायपुर पुलिस अब फरार मास्टरमाइंड विकास शुक्ला और संजय शर्मा की गिरफ्तारी के लिए अहमदाबाद पुलिस के संपर्क में है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ठगी के पैसे को किस माध्यम से भारत लाया जाता था और क्या इसमें कोई हवाला नेटवर्क भी शामिल है। रायपुर के एसएसपी ने बताया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट है और इसमें शामिल हर छोटे-बड़े अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी चल रहे संदिग्ध कॉल सेंटरों पर पुलिस की नजर है।
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