छत्तीसगढ़

Raipur LPG Crisis : रायपुर में नए एलपीजी गैस कनेक्शन पर रोक, पुराना नाम ट्रांसफर कराने उमड़े लोग

Raipur LPG Crisis :  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर उपजे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब आम भारतीय नागरिकों की घरेलू रसोई तक पहुंचने लगा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शहरी व ग्रामीण इलाकों की अधिकांश गैस एजेंसियों में इन दिनों नए एलपीजी (LPG) कनेक्शन के लिए आवेदन फॉर्म मिलने पूरी तरह बंद हो गए हैं। इस अप्रत्याशित संकट के कारण जरूरतमंद और गरीब परिवारों को एक अदद घरेलू गैस कनेक्शन के लिए हफ्तों लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में शादियों का सीजन होने, नए किराये के मकानों में लोगों की शिफ्टिंग और नए परिवारों के गठन जैसी परिस्थितियों में रसोई गैस न मिल पाने से नागरिकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इस विकट स्थिति से निपटने के लिए अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने पुराने पारिवारिक गैस कनेक्शन को ही परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर (हस्तांतरित) कराने का विकल्प चुन रहे हैं।

एजेंसियों में नए कनेक्शन पर अघोषित पाबंदी: कालाबाजारी बढ़ने की आशंका से सहमे लोग

राजधानी रायपुर में सक्रिय इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस जैसी प्रमुख सार्वजनिक तेल कंपनियों ने हालांकि अपनी ऑनलाइन नाम ट्रांसफर प्रक्रिया को पहले से काफी आसान और डिजिटल बना दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर गैस एजेंसियों द्वारा दस्तावेजों की कड़ाई से जांच करने और अंतिम मंजूरी देने में अब भी बहुत अधिक समय लग रहा है। परेशान उपभोक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि बाजार में नए गैस कनेक्शन पूरी तरह बंद होने जैसी स्थिति निर्मित होने से उनकी पूरी घरेलू व्यवस्था पटरी से उतर गई है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की अवैध रूप से ब्लैक (कालाबाजारी) में ऊंचे दामों पर बिक्री होने की आशंका भी तेजी से बढ़ने लगी है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ सकता है।

पश्चिम एशिया के सैन्य संघर्ष का सीधा असर: तेल कंपनियों की बदली प्राथमिकताएं

वैश्विक रणनीतिकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की पूरी सप्लाई चेन बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो गई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की मची इसी किल्लत को देखते हुए भारतीय तेल कंपनियों ने रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने केवल मौजूदा (पुराने) उपभोक्ताओं को ही प्राथमिकता के आधार पर निर्बाध सिलेंडर उपलब्ध कराने की नीति पर जोर देना शुरू किया है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से देश भर में नए कनेक्शनों को सीमित या पूरी तरह होल्ड किए जाने की चर्चाएं अब बेहद तेज हो गई हैं, जिसके चलते रायपुर की सभी गैस एजेंसियों में इन दिनों केवल पुराने कनेक्शन ट्रांसफर कराने वाले आवेदकों की ही भारी भीड़ उमड़ रही है।

डिजिटल ट्रांसफर प्रक्रिया से थोड़ी राहत: इन जरूरी दस्तावेजों की पड़ रही है आवश्यकता

बढ़ते संकट के बीच राहत की बात यह है कि गैस कंपनियों ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से कनेक्शन ट्रांसफर की पारदर्शी सुविधा प्रदान की है। इस नियम के तहत परिवार के मुख्य सदस्य, पति-पत्नी या माता-पिता के नाम पर मौजूद पुराने सक्रिय कनेक्शन को सगे नातेदारों या कानूनी वारिसों के नाम पर आसानी से बदला जा सकता है। इस डिजिटल प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवेदकों के पास वैध पहचान पत्र, पता प्रमाण पत्र, लिंक मोबाइल नंबर और आपसी संबंध को प्रमाणित करने वाले सरकारी दस्तावेज होना अनिवार्य है। एजेंसियों के दफ्तरों में लगने वाली लंबी कतारों और भीड़ से बचने के लिए अब अधिकतर शहरी लोग इस डिजिटल प्रक्रिया का ही सहारा ले रहे हैं।

नए शहरों में शिफ्ट होने वाले प्रवासियों की बढ़ी आफत: एड्रेस वेरिफिकेशन में लग रहा लंबा समय

नौकरी, व्यवसाय के सिलसिले में या उच्च शिक्षा की पढ़ाई के कारण दूसरे राज्यों व शहरों से रायपुर आकर किराये के मकानों में शिफ्ट होने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों को इस नए नियम से सबसे ज्यादा मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। किरायेनामे (रेंट एग्रीमेंट) पर रहने वाले लोगों को नए कनेक्शन देने से एजेंसियां साफ मना कर रही हैं। कई गंभीर मामलों में तो स्थानीय पुलिस और बिजली बिल के जरिए होने वाली पता सत्यापन (Address Verification) की प्रक्रिया कई सप्ताह लंबी खिंच रही है, जिसके कारण इन प्रवासी लोगों को अपनी रसोई शुरू करने के लिए कई-कई हफ्तों तक तरसना पड़ रहा है और वे बाहर का असुरक्षित खाना खाने को मजबूर हैं।

नवविवाहित दंपतियों के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती: बहुओं के नाम ट्रांसफर हो रहे कनेक्शन

शादी-ब्याह के बाद संयुक्त परिवार से अलग होकर नए आशियाने में अपनी नई गृहस्थी बसाने जा रहे नवविवाहित दंपतियों के लिए भी मौजूदा स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण बनी हुई है। कुछ महीनों पहले तक मामूली कागजी कार्रवाई के बाद चंद दिनों में नया गैस कनेक्शन आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब तेल कंपनियों के सख्त दिशा-निर्देशों के कारण स्थानीय गैस एजेंसियां केवल ट्रांसफर आवेदनों को ही पहली प्राथमिकता दे रही हैं।

इस लाचारी के चलते कई समझदार परिवार अपने मायके या पुराने पैतृक घर के घरेलू कनेक्शन को ही अपनी नई बहू या बेटी के नाम पर ट्रांसफर कराने के लिए कतारों में खड़े हैं ताकि उनके नए घर में गैस सिलेंडर की उपलब्धता बिना किसी रुकावट के लगातार बनी रहे।

ग्रामीण और बुजुर्ग उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी: एजेंसियों में फॉर्म की भारी किल्लत

सैकड़ों परेशान उपभोक्ताओं ने खाद्य विभाग से लिखित शिकायत की है कि शहर की कई गैस एजेंसियों में नए कनेक्शन के आवेदन फॉर्म जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कुछ गैस एजेंसियां तो अनपढ़ और कम पढ़े-लिखे लोगों को भी सीधे ऑनलाइन जाकर डिजिटल माध्यम से आवेदन करने की रूखी सलाह दे रही हैं। इसके अलावा, जमा किए गए दस्तावेजों में नाम या पते की स्पेलिंग में मामूली सी भी मानवीय त्रुटि पाए जाने पर आवेदनों को बिना सुने सीधे वापस लौटाया जा रहा है।

तकनीक से दूर रहने वाले बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब वर्ग के लोगों को इस अड़ियल रवैये के कारण सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जमीनी हकीकत और पीड़ितों की आपबीती: हफ्तों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोग

रायपुर के डीडीनगर की रहने वाली पूजा साहू ने बताया कि शादी के बाद वे अपने पति के साथ नए मकान में रहने पहुंची थीं। उन्होंने नया गैस कनेक्शन लेने के लिए जब स्थानीय एजेंसी में संपर्क किया, तो उन्हें आवेदन फॉर्म तक नहीं दिया गया। थक-हारकर अब उन्होंने अपने मायके वाले पुराने कनेक्शन को अपने नाम पर ट्रांसफर कराने की जटिल प्रक्रिया शुरू की है और पिछले तीन सप्ताह से केवल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने का इंतजार कर रही हैं। इसी तरह, भनपुरी इलाके में रहने वाले मनोज वर्मा जो अपनी नई नौकरी के सिलसिले में रायपुर शिफ्ट हुए हैं, उन्हें किरायेदार होने के कारण नया कनेक्शन नहीं मिल पाया। एजेंसी ने उन्हें ऑनलाइन अप्लाई करने को कहा है, लेकिन पता सत्यापन में भारी देरी होने के कारण फिलहाल वे अपने पड़ोसी के सिलेंडर से बेमन से काम चला रहे हैं।

प्रशासन की दखल और आधिकारिक बयान: जल्द बैठक लेकर बहाल होगी सामान्य व्यवस्था

इस पूरे गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए रायपुर जिले के खाद्य विभाग के नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय ईंधन संकट को देखते हुए वर्तमान में नए एलपीजी कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पर तेल कंपनियों ने अस्थाई रूप से कुछ कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इस समस्या को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय के पास भी आम नागरिकों और विभिन्न संगठनों की तरफ से लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। खाद्य नियंत्रक ने आश्वासन दिया है कि आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए जल्द ही सभी तेल कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों और गैस एजेंसी संचालकों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी, ताकि इस समस्या का त्वरित समाधान खोजकर नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया को दोबारा सुचारू रूप से शुरू कराया जा सके।

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