Raipur Magneto Mall: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के चर्चित मैग्नेटो मॉल तोड़फोड़ मामले में गिरफ्तार बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को जमानत मिल गई है। नए साल के पहले दिन, यानी 1 जनवरी की रात को लगभग आधा दर्जन कार्यकर्ता रायपुर की सेंट्रल जेल से रिहा हुए। जेल के बाहर उनका स्वागत किसी नायक की तरह किया गया। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनकी अगवानी की, उन्हें मालाएं पहनाई गईं और उनके परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक रूप से उनकी आरती उतारी। कार्यकर्ताओं के बाहर निकलते ही समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और जमकर नारेबाजी की।
Raipur Magneto Mall: दिसंबर में छत्तीसगढ़ बंद के दौरान हुआ था बड़ा विवाद
यह पूरा विवाद 24 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब संगठनों द्वारा छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया गया था। आरोप है कि इस दौरान बजरंग दल के दर्जनों कार्यकर्ता तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित मैग्नेटो मॉल में जबरन घुस गए थे। वहां उन्होंने न केवल हंगामा किया, बल्कि कर्मचारियों से उनका धर्म पूछकर मॉल की संपत्तियों में तोड़फोड़ भी की। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ मुख्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था, जिसके बाद से ही संगठन और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
Raipur Magneto Mall: गिरफ्तारी के विरोध में हुआ था 10 घंटे का लंबा चक्काजाम
अपने साथियों की गिरफ्तारी से आक्रोशित बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 27 दिसंबर को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। रायपुर के तेलीबांधा थाने के सामने सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लगभग 10 घंटे तक धरना दिया और सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। इस प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गरमाया हुआ था और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। दिलचस्प बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने थाने के ठीक सामने सड़क पर हवन-पूजन भी किया था। काफी गहमागहमी के बाद पुलिस ने उन कार्यकर्ताओं की सांकेतिक गिरफ्तारी की थी।
मैग्नेटो मॉल प्रबंधन का गंभीर आरोप: धर्म और जाति पूछकर की गई हिंसा
मॉल की मार्केटिंग हेड आभा गुप्ता ने घटना के दिन की भयावहता को साझा किया। उन्होंने बताया कि मॉल प्रबंधन ने बंद का समर्थन करते हुए मॉल को पहले ही बंद रखा था। इसके बावजूद, लगभग 50 से 100 लोग लाठी, डंडे और हॉकी स्टिक लेकर जबरन भीतर घुस आए। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी वहां मौजूद कर्मचारियों के आईडी कार्ड और बैच चेक कर रहे थे। कर्मचारियों से उनके धर्म और जाति के बारे में सवाल किए जा रहे थे, जैसे कि “आप हिंदू हो या क्रिश्चियन?”। इस दौरान मॉल के भीतर काफी नुकसान पहुंचाया गया था।
बजरंग दल का रुख: ‘धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गए जेल’
इन कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद बजरंग दल के जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा ने संगठन का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि संगठन को अपने इन कार्यकर्ताओं पर गर्व है। वर्मा के अनुसार, ये कार्यकर्ता किसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा करने के उद्देश्य से जेल गए थे। जेल के बाहर बड़ी संख्या में बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौजूद थे, जो इसे अपनी नैतिक जीत मान रहे हैं।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने शहर की कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गिरफ्तारियां कीं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के दबाव के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। फिलहाल, आरोपियों के बाहर आने के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन मॉल प्रबंधन और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं अभी भी बरकरार हैं।
















