Raipur Oil Factory Fire : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र उरला से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित पोरवाल ऑयल फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आपको बता दें कि इस फैक्ट्री में पुराने और बेकार टायरों को अत्यधिक तापमान पर जलाकर डामर (एस्फाल्ट) बनाने का व्यावसायिक काम बड़े पैमाने पर किया जाता है। फैक्ट्रियों में ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण आग ने बेहद कम समय में विकराल रूप धारण कर लिया था, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों और आस-पास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

दमकल और पुलिस की मुस्तैदी से काबू में आई लपटें
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय उरला थाना पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां बिना कोई वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव दल ने फौरन मोर्चा संभाला और आग बुझाने की कवायद शुरू की। दमकलकर्मियों की भारी मशक्कत और समय पर की गई त्वरित कार्रवाई की बदौलत कुछ ही घंटों में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। सबसे राहत की बात यह रही कि आपदा प्रबंधन टीम और पुलिस कर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए फैक्ट्री परिसर के भीतर फंसे हुए सभी कर्मचारियों और मजदूरों को बेहद सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया, जिससे एक बहुत बड़ी जनहानि होने से टल गई।

हादसे में एक कर्मचारी गंभीर रूप से झुलसा
हालांकि, इस भीषण अग्रिकांड के दौरान एक अप्रिय घटना भी घटित हुई। जब आग फैली, तो वहां मौजूद एक व्यक्ति इसकी चपेट में आ गया और वह बुरी तरह से झुलस गया। घायल व्यक्ति को तुरंत एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता उस घायल व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है। हालांकि, अभी तक इस बात का सटीक खुलासा नहीं हो पाया है कि आखिर आग लगने की असली और मुख्य वजह क्या थी। पुलिस और फायर ब्रिगेड की तकनीकी टीम आग लगने के अज्ञात कारणों की विस्तृत जांच कर रही है।
मलबे से शुरू हुई चिंगारी ने टायरों के कारण लिया विकराल रूप
शुरुआती जांच और चश्मदीदों से मिली जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत सबसे पहले फैक्ट्री परिसर के एक कोने में पड़े छोटे मलबे और कचरे के ढेर से हुई थी। चूंकि यह एक ऐसी फैक्ट्री है जहां टायरों को जलाकर डामर तैयार किया जाता है, इसलिए वहां भारी मात्रा में रबर, प्रयुक्त तेल और अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल का स्टॉक मौजूद था। मलबे में लगी छोटी सी चिंगारी ने इन टायरों और केमिकल्स के संपर्क में आते ही भयानक रूप ले लिया और आग तेजी से फैलती चली गई। रबर के जलने के कारण आग को बुझाने में दमकल कर्मियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
समय रहते टला बड़ा धमाका, वरना हो सकती थी भारी तबाही
इस पूरे घटनाक्रम में संतोषजनक बात यह रही कि समय रहते दमकल और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पा लिया। जानकारों का कहना है कि अगर आग बुझाने में थोड़ी सी भी देरी हो जाती, तो यह फैक्ट्री के मुख्य रिफाइनिंग यूनिट और बड़े ऑयल टैंकों तक पहुंच सकती थी। ऐसी स्थिति में फैक्ट्री के भीतर एक के बाद एक कई बड़े ब्लास्ट (धमाके) हो सकते थे, जो न सिर्फ पोरवाल ऑयल फैक्ट्री को खाक कर देते, बल्कि आस-पास की अन्य फैक्ट्रियों और बस्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा सकते थे। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कूलिंग का काम पूरा कर लिया गया है।











