Rajasthan UCC Bill 2026: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC बिल 2026 को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। सरकार के मुताबिक, इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। हालांकि, प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधान अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं होंगे।

विवाह और तलाक के लिए समान कानूनी व्यवस्था
प्रस्तावित UCC में विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार बहुविवाह पर रोक रहेगी और विवाह विच्छेद यानी तलाक की प्रक्रिया अदालत के माध्यम से ही पूरी होगी। धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत किए गए विवाहों को भी मान्यता देने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा विवाह की निर्धारित आयु से जुड़े मौजूदा प्रावधानों को भी बरकरार रखने की बात कही गई है।

60 दिनों में विवाह का पंजीकरण जरूरी
संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार कानून लागू होने के बाद नए विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। हालांकि, निर्धारित अवधि में विवाह का पंजीकरण नहीं होने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं होगा। सरकारी सेवाओं में पंजीकृत विवाह को मान्यता देने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विवाह से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना बताया गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप का भी होगा पंजीकरण
प्रस्तावित विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है। इसके तहत लिव-इन संबंध शुरू करने और समाप्त करने से संबंधित सूचना या पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के जरिए ऐसे संबंधों से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाएगा। लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाली संतान को भी कानूनी अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है।
आवेदन पर 15 दिन में फैसला
मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार विवाह या तलाक से संबंधित मेमोरेंडम दाखिल होने के बाद आवेदन पर 15 दिनों के भीतर निर्णय देने का प्रावधान प्रस्तावित है। यदि आवेदन खारिज किया जाता है तो संबंधित पक्ष को अपीलीय अदालत में जाने का अवसर मिलेगा। अपीलीय स्तर पर मामले की सुनवाई और निर्णय के लिए 60 दिनों की समयसीमा का प्रावधान बताया गया है।

देरी पर जुर्माने का भी प्रावधान
UCC के प्रस्तावित प्रावधानों में नियमों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड की व्यवस्था भी रखी गई है। जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में 10 हजार रुपये की पेनल्टी और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। यदि विवाह पंजीकरण में रजिस्ट्रार जानबूझकर देरी करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
विवाह शून्य होने के नियम रहेंगे कायम
सरकार के अनुसार जबरन या धोखे से प्राप्त सहमति के आधार पर विवाह तथा नपुंसकता जैसी परिस्थितियों में विवाह को शून्य घोषित करने से संबंधित प्रावधान पहले से मौजूद हैं और आगे भी लागू रहेंगे। मंत्री ने बताया कि विवाह से जुड़े मामलों में तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य नागरिकों को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
बेटे-बेटियों को उत्तराधिकार में समान अधिकार
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में उत्तराधिकार के मामले में बेटियों और बेटों को समान अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार यदि निर्धारित तीनों श्रेणियों में कोई उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं होगा, तो संपत्ति सरकार के पास जाने का प्रावधान हो सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित देनदारियों की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी।
रंजना देसाई समिति ने किया था अध्ययन
जोगाराम पटेल ने बताया कि UCC के मसौदे की तैयारी के लिए रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। समिति ने कई राज्यों में लागू कानूनों का अध्ययन किया और राजस्थान के विभिन्न संभागों में प्रमुख लोगों से बातचीत कर सुझाव लिए। सरकार का कहना है कि व्यापक अध्ययन और परामर्श के बाद प्रस्तावित विधेयक तैयार किया गया है।
आदिवासी क्षेत्रों को प्रावधानों से रखा गया बाहर
संसदीय कार्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं होंगे। सरकार इसे राज्य में नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। अब आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पेश होने के बाद इसके प्रावधानों पर सदन में चर्चा होगी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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