Rajya Sabha Election 2026
Rajya Sabha Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी उच्च सदन के चुनावों के लिए अपने चार प्रमुख उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस बार की सूची में पार्टी ने अनुभव, ग्लैमर और कानूनी विशेषज्ञता का एक अनूठा संतुलन बनाने की कोशिश की है। टीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के जरिए इन नामों की पुष्टि की। पार्टी ने विश्वास जताया है कि ये उम्मीदवार संसद में बंगाल की आवाज को मजबूती से उठाएंगे और देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराएंगे।
TMC द्वारा जारी की गई सूची में सबसे चौंकाने वाला और चर्चित नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का है, जो अब राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके साथ ही बंगाली सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है, जो पार्टी के ‘ग्लैमर और जन-जुड़ाव’ के फॉर्मूले को दर्शाती हैं। प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देते हुए पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का नाम भी इस सूची में शामिल किया गया है। वहीं, कानूनी मोर्चे पर पार्टी को मजबूती देने के लिए वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया गया है। इन चारों नामों के चयन से साफ है कि ममता बनर्जी संसद में हर क्षेत्र के विशेषज्ञों को भेजना चाहती हैं।
भारत के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल की 5 सीटें भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन सीटों के लिए आगामी 16 मार्च को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। बंगाल विधानसभा के वर्तमान स्वरूप और विधायकों की संख्या को देखते हुए सीटों का बंटवारा स्पष्ट नजर आ रहा है। राज्य में कुल 5 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है। संख्या बल के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि 4 सीटें टीएमसी के खाते में जाएंगी, जबकि विपक्षी दल भाजपा भी अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में सीटों का समीकरण देखें तो ममता बनर्जी की टीएमसी के पास वर्तमान में 223 से 225 विधायकों का भारी समर्थन है। इस बहुमत के साथ पार्टी आसानी से 4 राज्यसभा सीटें जीतने की स्थिति में है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास 64 से 65 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को न्यूनतम 49 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा अपने दम पर पहली बार बंगाल से अपना प्रतिनिधि राज्यसभा भेजने में सक्षम होगी। यह बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहाँ बीजेपी अब विधायी प्रक्रियाओं में अपनी स्वतंत्र उपस्थिति दर्ज करा रही है।
इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान वामपंथी दल (CPI-M) को होता दिख रहा है। इससे पहले खाली हुई इन 5 सीटों में से 4 सीटें टीएमसी के पास थीं और एक सीट माकपा के पास थी। लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के बाद बदले हुए समीकरणों ने माकपा को दौड़ से बाहर कर दिया है। इस बार किसी भी प्रमुख गठबंधन की संभावना नहीं होने के कारण, माकपा के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। नतीजतन, वह एक सीट अब भाजपा के खाते में जाती दिख रही है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग के बाद बंगाल से राज्यसभा की नई तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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