Ram Bhadracharya
Ram Bhadracharya: मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे प्रख्यात संत और जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने बेबाक बयानों से एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने ज्योतिष पीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज द्वारा सरकार पर लगाए गए ‘अन्याय’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। रामभद्राचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अन्याय उनके साथ नहीं हुआ है, बल्कि उन्होंने स्वयं नियमों का उल्लंघन कर अन्याय किया है।” उन्होंने मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार गंगा तट पर रथ से जाना वर्जित है। जब पुलिस ने उन्हें रोका था, तो उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए था। रामभद्राचार्य ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि हम लोग स्वयं संगम और गंगा तट पर पैदल जाते हैं, रथ का उपयोग करना शास्त्र सम्मत नहीं है।
रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद की गरिमा और उसकी कानूनी स्थिति पर भी बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभी तो सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आधिकारिक रूप से शंकराचार्य स्वीकार ही नहीं किया है। उन्होंने पद की मर्यादा पर तंज कसते हुए कहा, “मैं जगद्गुरु हूं, लेकिन वह तो अभी पूर्ण रूप से जगद्गुरु भी नहीं बने हैं।” इसके साथ ही, हाल ही में सरकार द्वारा अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए नोटिस का समर्थन करते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकार का यह कदम पूरी तरह सही है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
अपने शिष्य और बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया विवादास्पद बयान पर भी रामभद्राचार्य ने अपनी राय रखी। धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं को ‘चार बच्चे पैदा करने’ की सलाह दी थी, जिस पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। इस पर रामभद्राचार्य ने अपने शिष्य का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा है, वह ठीक है। उन्होंने इस बयान को जनसांख्यिकीय संतुलन और सनातन धर्म की रक्षा के दृष्टिकोण से सही ठहराया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अक्सर हिंदू शब्द और हिंदुत्व को लेकर बयान देते रहते हैं। उनके एक हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि दिग्विजय सिंह को शास्त्रों का रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है। उन्होंने शास्त्रों से कुछ श्लोकों का उदाहरण देते हुए यह सिद्ध किया कि ‘हिंदू’ शब्द प्राचीन और अर्थपूर्ण है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिन्हें शास्त्रों की जानकारी नहीं है, उनकी बातों पर टिप्पणी करना व्यर्थ है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य न केवल हिंदू धर्म के प्रमुख संत हैं, बल्कि वे 22 भाषाओं के ज्ञाता और 100 से अधिक पुस्तकों के लेखक भी हैं। अपनी प्रखर मेधा और सनातन धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के कारण वे अक्सर राष्ट्रीय सुर्खियों में रहते हैं। राम जन्मभूमि मामले में उनके द्वारा दी गई शास्त्र सम्मत गवाही को अदालत ने भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना था। टीवी डिबेट्स से लेकर धार्मिक मंचों तक, वे अपने ज्ञान के आधार पर सदैव सनातन की रक्षा के लिए खड़े नजर आते हैं।
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