Ram Madhav statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मतभेद की अटकलों पर RSS के वरिष्ठ नेता राम माधव ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ के बीच कोई मतभेद नहीं है और दोनों संगठन एक ही वैचारिक परिवार का हिस्सा हैं। उनका यह बयान तब आया है जब स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरएसएस की प्रशंसा किए जाने के बाद विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस, ने तीखा विरोध दर्ज कराया। “RSS राजनीति में नहीं, BJP समाजसेवा में नहीं” – राम माधव राम माधव ने साफ किया कि, “भाजपा राजनीति में सक्रिय है जबकि आरएसएस समाज सेवा में कार्यरत है। दोनों का कार्यक्षेत्र अलग है, लेकिन उद्देश्य एक ही — राष्ट्र निर्माण। इसीलिए इन्हें एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी संगठन समझा जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों के बीच वैचारिक एकता और लक्ष्य की स्पष्टता है। प्रधानमंत्री का बयान बना विवाद की जड़ 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में RSS की सराहना करते हुए कहा था, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है, जिसने पिछले 100 वर्षों में राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण की मिसाल पेश की है।” इस बयान के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया। कांग्रेस का आरोप: “संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन” प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर किसी एक संगठन की प्रशंसा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा, “लगता है प्रधानमंत्री संघ प्रमुख की कृपा पाने के लिए कोशिश कर रहे हैं।” राम माधव का पलटवार: “राजनीतिक चश्मा पहनकर मत देखिए संघ को” विपक्ष के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए राम माधव ने कहा, “आरएसएस को राजनीतिक चश्मे से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। संघ का कार्य सामाजिक और सांस्कृतिक है, न कि राजनीतिक।” उन्होंने आगे जोड़ा कि प्रधानमंत्री का संघ की सेवाओं की सराहना करना देशभक्ति और सेवा को सम्मान देना है, न कि किसी विचारधारा को बढ़ावा देना। विवाद के राजनीतिक मायने राम माधव के बयान के बावजूद विपक्ष प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में संघ के उल्लेख को लेकर हमलावर बना हुआ है। यह विवाद आगे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रह सकता है, खासकर जब देश कई राज्यों के चुनावों की ओर बढ़ रहा है। राम माधव का यह स्पष्टिकरण BJP और RSS के रिश्तों को लेकर उठ रहे सवालों को थामने की कोशिश है, लेकिन प्रधानमंत्री के संघ की तारीफ के बाद उठे विवाद ने इसे एक गहरी वैचारिक बहस में तब्दील कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इसे कैसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर उठाता है और भाजपा इसकी क्या रणनीतिक प्रतिक्रिया देती है। Read More : Trump Russia meeting : अमेरिका-रूस मीटिंग के बाद राहत की खबर, ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर नए टैरिफ से किया इनकार
















