Ram Mandir Case : सोने के पन्नों वाली रामचरितमानस आखिर कहां गई, जानिए पूरा विवाद अब विस्तार से

Ram Mandir Case :  अयोध्या के राम मंदिर में दान की गई सामग्री के प्रबंधन को लेकर एक नया और चौंकाने वाला विवाद सामने आया है। पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने राम मंदिर ट्रस्ट को दान की गई बेशकीमती ‘सोने की रामचरितमानस’ के गायब होने और उसे लेकर उपजी चिंताओं को सार्वजनिक किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि 8 अप्रैल 2024 को उन्होंने यह अद्वितीय उपहार मंदिर को समर्पित किया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें न तो दान की कोई रसीद दी गई और न ही ट्रस्ट की ओर से किसी प्रकार की पावती (Acknowledgement Receipt) प्राप्त हुई।

ads

पारिवारिक गहनों को गलाकर तैयार की गई थी दिव्य पांडुलिपि

इस मामले में भावुक पहलू यह है कि एस. लक्ष्मीनारायण ने इसे केवल एक दान नहीं, बल्कि अपनी आस्था का प्रतीक माना था। उन्होंने बताया कि इस बेशकीमती रामचरितमानस को तैयार करने के लिए उन्होंने अपनी मां और पत्नी के पैतृक गहनों को गलवाया था। इस पांडुलिपि का निर्माण सोने, चांदी और तांबे के मिश्रण से किया गया था, जिसका कुल वजन लगभग 147 किलोग्राम है। इसमें सोने की परत चढ़े 522 पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक अंकित हैं। अपनी पूरी पूंजी और भावनाओं को अर्पित करने के बाद अब वे यह जानने के लिए व्यथित हैं कि उनकी श्रद्धा का प्रतीक आखिर इस समय कहां है।

Adst

प्रशासनिक स्तर पर टालमटोल और अनसुनी फरियाद

लक्ष्मीनारायण ने आरोप लगाया कि इस विषय पर उन्होंने न्याय पाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की थी, जहां उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तत्कालीन सलाहकार अवनीश अवस्थी से शिकायत की, तो उन्हें यह कहकर निराश किया गया कि “दान दिया था तो उसे दान समझकर भूल जाइए।” उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी गंभीर सवाल उठाए। लक्ष्मीनारायण के अनुसार, चंपत राय ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि “मंदिर में वही होगा जो वे चाहेंगे।”

रामचरितमानस के गायब होने की रहस्यमयी घटना

दानकर्ता के अनुसार, प्रारंभ में यह सोने की रामचरितमानस मंदिर परिसर में भक्तों के दर्शन के लिए रखी गई थी और वहां इसकी नियमित पूजा भी होती थी। लेकिन अचानक, बिना किसी सूचना या स्पष्टीकरण के, इसे वहां से हटा दिया गया। अब उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि इतनी बहुमूल्य वस्तु को ट्रस्ट ने सुरक्षित रखा है या उसे कहीं स्थानांतरित कर दिया गया है। वे इस अनिश्चितता को लेकर अत्यंत चिंतित हैं।

चंपत राय की जवाबदेही पर उठे सवाल

एस. लक्ष्मीनारायण ने इस संपूर्ण घटनाक्रम की सीधी जिम्मेदारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर मढ़ते हुए कहा कि मंदिर का प्रबंधन उन्हीं की निगरानी में था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं के 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। दानदाताओं की उपेक्षा और मंदिर की कीमती वस्तुओं के इस प्रकार गायब होने से न केवल उनकी व्यक्तिगत भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो गया है। वे अब इस मामले में स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

Read more : Meta AI : सिर्फ टेक्स्ट लिखकर बनाएं गेम्स, Meta का नया AI ऐप हुआ लॉन्च आसान इस्तेमाल

Adst
Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.