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Ram Mandir Dhwajarohan: रामनगरी अयोध्या में धर्म ध्वजारोहण, PM मोदी के हाथों होगा यह ऐतिहासिक कार्य

Ram Mandir Dhwajarohan: अयोध्या की पावन भूमि पर स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज एक अत्यंत शुभ और ऐतिहासिक कार्य संपन्न होगा। मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण का यह पुनीत कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा। इस विशेष धर्म ध्वज में चमकता सूरज, कोविदार का वृक्ष और ‘ॐ’ अंकित है, जो सनातन धर्म के गौरव और भगवान राम की आभा का प्रतीक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत सहित कई अन्य विशिष्ट अतिथि इस समारोह के साक्षी बनेंगे। भव्य तीन मंजिला राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह धर्म ध्वजारोहण एक शुभ मुहूर्त में हो रहा है।यह पावन अवसर भगवान राम और माता सीता की विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त में आयोजित हो रहा है, जो इसे और भी अधिक दिव्य बनाता है। अयोध्या में यह ऐतिहासिक समारोह करीब ढाई घंटे तक चलेगा, जिसकी तैयारियां लंबे समय से चल रही थीं।

Ram Mandir Dhwajarohan: केवल 4 मिनट में होगा शिखर पर ध्वजारोहण

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता शरद शर्मा के अनुसार, ध्वजारोहण का शुभ कार्य अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:10 बजे से 12:30 बजे के बीच संपन्न होगा। मंदिर के 161 फीट ऊँचे शिखर पर केसरिया रंग की यह धर्म ध्वजा फहराई जाएगी।

यह कार्य तकनीकी रूप से संपन्न किया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी नीचे से एक बटन दबाएंगे, जिसके बाद एक मशीन रस्सी के सहारे धर्म ध्वजा को शिखर तक पहुँचाएगी। इस पूरे ध्वजारोहण प्रक्रिया में अनुमानित रूप से केवल 4 मिनट का समय लगेगा। मंदिर का शिखर 161 फीट ऊँचा है और इसके ऊपर 30 फीट लंबे ध्वज दंड पर केसरिया ध्वज अपनी पूरी शान के साथ लहराएगा। यह क्षण करोड़ों रामभक्तों के लिए आस्था और गौरव का प्रतीक होगा।

Ram Mandir Dhwajarohan: ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री का विशेष कार्यक्रम

धर्म ध्वजारोहण के मुख्य समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विस्तृत पूजा और दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित है।

  • सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री सबसे पहले अयोध्या के सप्तमंदिर जाएंगे।

  • वह वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, अहिल्या, निषादराज गुहा और शबरी के मंदिरों में दर्शन करेंगे।

  • सुबह 10 बजे के बाद वह सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन करेंगे।

  • इसके अतिरिक्त, वह शेषावतार मंदिर और सुबह 11 बजे माता अन्नपूर्णा मंदिर भी जाएंगे।

  • वह राम दरबार और गर्भगृह में विशेष दर्शन-पूजन करेंगे।

इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों के बाद, दोपहर 12 बजे श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा झंडा फहराया जाएगा। ध्वज का आकार 10 फीट ऊँचा और 20 फीट लंबा समकोण वाला त्रिकोणाकार है। यह ध्वज भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक चमकते सूरज की तस्वीर के साथ-साथ कोविदार वृक्ष और ‘ॐ’ से सुसज्जित है।

अयोध्या में दीपावली जैसा अद्भुत नज़ारा

राम मंदिर में धर्म ध्वजारोहण समारोह के अवसर पर पूरी राम नगरी में दीपावली जैसा अद्भुत और मनमोहक माहौल छा गया है। पूरी अयोध्या नगरी रोशनी से जगमगा उठी है। रात के समय प्रकाशपुंजों से सराबोर राम मंदिर का दृश्य अत्यंत अलौकिक और मन को शांति प्रदान करने वाला होता है। यह रोशनी केवल प्रकाश नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और राम राज्य के आगमन का प्रतीक है।

मंदिर की स्थापत्य कला और परकोटा

मंदिर का मुख्य शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में बना हुआ है, जिसकी ऊँचाई 161 फीट है। मंदिर के चारों ओर 800 मीटर लंबा परकोटा (बाहरी दीवार) बनाया गया है।

यह परकोटा दक्षिण भारतीय शैली में डिज़ाइन किया गया है, जो उत्तर और दक्षिण भारत की स्थापत्य कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण पर आधारित भगवान राम के जीवन से जुड़े 87 प्रसंगों को पत्थरों पर अत्यंत बारीकी से उकेरा गया है। इसके अलावा, दीवारों पर भारतीय संस्कृति की 79 कांस्य-ढाल वाली कहानियाँ भी तस्वीरों के रूप में अंकित की गई हैं, जो मंदिर को एक जीवंत कलाकृति बनाती हैं।

अभेद्य सुरक्षा घेरे में रामनगरी

इस ऐतिहासिक समारोह के मद्देनज़र, रामनगरी अयोध्या को पूरी तरह से किले में बदल दिया गया है। राम मंदिर परिसर में 6970 सुरक्षाकर्मियों का एक अभेद्य घेरा बनाया गया है। एटीएस (ATS), एनएसजी (NSG) से लेकर साइबर सिक्योरिटी टीम तक, हर विशिष्ट सुरक्षा इकाई को तैनात किया गया है। इसके अलावा, एंटी ड्रोन सिस्टम, स्नाइपर और 90 तकनीकी विशेषज्ञ भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हैं, ताकि समारोह पूरी तरह से सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।

विवाह पंचमी और गुरु तेग बहादुर जी का स्मरण

यह धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी तिथि को आयोजित किया गया है। यह दिन राम और सीता की विवाह पंचमी का अभिजीत मुहूर्त भी है, जिसे दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है।यह शुभ तिथि 9वें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस की भी है। एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य यह है कि गुरु तेग बहादुर जी ने 17वीं शताब्दी में अयोध्या में लगातार 48 घंटों तक ध्यान किया था, जो इस दिन को एक बहु-धार्मिक महत्व प्रदान करता है।

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