राम मंदिर चंदा मामले की जांच अब अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जांच की स्थिति से अवगत कराया है। अदालत ने संबंधित कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी है। अब 25 सितंबर की तारीख पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राम मंदिर चंदा मामले की जांच अब अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जांच की स्थिति से अवगत कराया है। अदालत ने संबंधित कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी है। अब 25 सितंबर की तारीख पर सभी की नजरें टिकी हैं।

Ram Mandir Donation Case : अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी के मामले में जांच लगभग पूरी हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि विशेष जांच दल यानी एसआईटी अपनी जांच पूरी करने के अंतिम चरण में है। सरकार के मुताबिक, मामले में 90 दिनों की जांच अवधि 25 सितंबर को समाप्त हो रही है और इससे पहले या इसी तारीख तक सक्षम अदालत में आरोपपत्र यानी चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दे दी है।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने एसआईटी की ओर से दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट पर गौर किया। इस रिपोर्ट में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपियों की पहचान से जुड़ी कार्रवाई का विवरण दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को जांच की प्रगति से अवगत कराया और बताया कि मामले में आवश्यक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा चुका है।

एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान राम मंदिर परिसर और उससे संबंधित स्थानों से उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इसके साथ ही अन्य उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया। जांच एजेंसी ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल बताए जा रहे आरोपियों की पहचान की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी एसआईटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि आरोपियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सामग्री का विश्लेषण किया गया।
एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर में प्राप्त होने वाले कीमती सामान से जुड़ी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कीमती वस्तुओं के लिए रसीद एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती है। इसके बाद ऐसे कीमती सामान को भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जांच के दौरान इन प्रक्रियाओं और संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में रखा गया है। एसआईटी ने अदालत को बताया कि मामले में जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में निर्धारित 90 दिनों की जांच अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। सरकार के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद उससे पहले या अधिकतम 25 सितंबर तक संबंधित सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सेशंस कोर्ट को मामले में कानून के अनुसार आगे उचित आदेश पारित करने की अनुमति दे दी है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट मामले को सेशंस जज से अपने हाथ में लेने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया को संबंधित सक्षम अदालत के स्तर पर जारी रहने की अनुमति दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उसे लगता है कि मामले में किसी अतिरिक्त जांच की आवश्यकता है, तो वह बाद में उचित आदेश पारित कर सकता है। इस तरह फिलहाल जांच और चार्जशीट की अगली प्रक्रिया संबंधित अदालत के समक्ष आगे बढ़ेगी।
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