Ram Mandir Donation Scam: चढ़ावा घोटाले में बड़ा खुलासा, रिश्तेदारों के 30 बैंक खाते फ्रीज

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि कथित रूप से अवैध धन के लेन-देन को छिपाने के लिए कई रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इसी कड़ी में 30 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। आखिर जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला अब एक बड़े घोटाले की परतें खोल रहा है। पुलिस रिमांड के दौरान तीनों आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, उन्होंने मंदिर प्रशासन और जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले काफी समय से हर रोज मंदिर के दान पात्र और गिनती कक्ष से बड़ी रकम पार कर रहे थे। इस काली कमाई को वैध (सफेद) दिखाने और कानूनी जांच से बचने के लिए उन्होंने एक सोची-समझी रणनीति बनाई थी। उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके मनी लॉन्ड्रिंग का एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था, ताकि किसी को भी रकम के असली स्रोत का संदेह न हो।

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मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क: रिश्तेदारों के खातों का हुआ दुरुपयोग

जांच में सामने आया है कि आरोपी चोरी की राशि को सीधे अपने बैंक खातों में जमा नहीं करते थे, बल्कि उसे अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद, उस रकम को घुमा-फिराकर वापस अपने व्यक्तिगत खातों में मंगा लिया जाता था, ताकि ऑडिट के दौरान पकड़े न जाएं। पुलिस ने बैंक डिटेल्स की बारीकी से स्क्रूटनी की, जिसमें इस संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। जांच टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। इन खातों की छानबीन में यह पाया गया कि इनमें आरोपियों की ज्ञात आय के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा जमा हुआ है, जो सीधे तौर पर मंदिर के चढ़ावे की चोरी की ओर इशारा करता है।

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मिलीभगत का जाल: अंदरूनी लोगों की संलिप्तता का पर्दाफाश

इस पूरे अपराध के पीछे गहरे स्तर पर मिलीभगत का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने बताया कि टिन्नू और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की सीधी मदद के कारण नोटों की गिनती वाले कमरे से रकम निकालना उनके लिए बेहद आसान था। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी अक्सर अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों का संचालन खुद ही करते थे, और घर के कई सदस्यों को यह भनक तक नहीं थी कि उनके खातों का इस्तेमाल इस गैर-कानूनी काम में हो रहा है। हालांकि, आरोपी अविनाश शुक्ला का भाई अभिषेक इस पूरी साजिश से पूरी तरह वाकिफ था। पुलिस अब उन सभी खाताधारकों को रडार पर ले रही है जिनके खातों में चोरी की रकम पार्क की गई थी।

क्राइम सीन री-क्रिएशन: साक्ष्यों को मजबूती से पेश करने की तैयारी

पूछताछ से मिले पुख्ता सबूतों के बाद अब पुलिस का मुख्य ध्यान बरामदगी पर केंद्रित है। बुधवार को पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उस सुनसान बाग में ले गई, जहाँ वे चोरी के बाद बैठकर आपस में रकम का बंटवारा करते थे। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने ‘क्राइम सीन का री-क्रिएशन’ किया और पूरे घटनाक्रम का भौतिक सत्यापन किया। आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों का मिलान किया गया ताकि यह पता चल सके कि छिपाई गई बाकी रकम कहां है। पुलिस इन तमाम साक्ष्यों को कोर्ट में एक मजबूत केस के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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Chandan Das

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