राजनीति

Ram Mandir in Shantipur: बंगाल के शांतिपुर में बनेगा भव्य राम मंदिर, रामायण रचयिता कृतिबास ओझा की विरासत होगी जीवंत

Ram Mandir in Shantipur: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही धार्मिक स्थलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद निर्माण की सुगबुगाहट और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ‘दुर्गा आंगन’ व ‘महाकाल मंदिर’ के हालिया शिलान्यास ने राज्य के राजनीतिक विमर्श को बदल दिया है। इसी कड़ी में अब नदिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ की थीम पर एक विशाल राम मंदिर बनाने की योजना सुर्खियों में है। यह प्रोजेक्ट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होगा, बल्कि इसे बंगाल की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। शांतिपुर, जो पहले से ही चैतन्य महाप्रभु और भक्ति आंदोलन के लिए विख्यात है, अब इस नए प्रोजेक्ट के माध्यम से देश के धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

कृतिबास ओझा की परंपरा: ‘श्रीराम पंचाली’ के रचयिता को समर्पित सांस्कृतिक केंद्र

प्रस्तावित मंदिर का आधार 15वीं शताब्दी के महान कवि कृतिबास ओझा की विरासत है। ओझा ने ही संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ के रूप में किया था, जिसे आज भी हर बंगाली परिवार में अत्यंत श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस मंदिर के माध्यम से ‘बंगाली राम’ की अवधारणा को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिन्हें स्थानीय संस्कृति में ‘हरा राम’ के नाम से भी संबोधित किया जाता है। ‘श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट’ इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अयोध्या के राम और बंगाल की लोक संस्कृति के बीच के गहरे संबंध को उजागर करना है। रविवार को मंदिर निर्माण के लिए जमीन के अंतिम सर्वेक्षण के साथ ही इस भव्य परियोजना की औपचारिक शुरुआत हो गई है।

राजनीति से परे आस्था: भाजपा नेता अरिंदम भट्टाचार्य और ट्रस्ट की भूमिका

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व शांतिपुर के पूर्व विधायक और वर्तमान भाजपा नेता अरिंदम भट्टाचार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे राजनीति से जुड़े हैं, लेकिन यह मंदिर कोई चुनावी हथकंडा नहीं है। ट्रस्ट 2017 से ही इस पर काम कर रहा है। भट्टाचार्य के अनुसार, शांतिपुर भक्ति आंदोलन की जननी रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाल की भावभूमि से जोड़कर घर-घर पहुंचाया था। मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासियों, लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी द्वारा दान की गई है। इस भव्य मंदिर और हेरिटेज सेंटर को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

शिक्षा और सेवा का संगम: मंदिर परिसर में बनेंगे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज

यह परियोजना केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इस ट्रस्ट का आधिकारिक संरक्षक बनाया गया है। मंदिर परिसर के भीतर एक व्यापक सांस्कृतिक केंद्र, शोध केंद्र और आधुनिक शिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना है। इसमें एक मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण भी शामिल है, ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें। भूमि दान करने वाली पूजा बनर्जी ने बताया कि 2025 में ट्रस्ट के विधिवत गठन के साथ ही कार्य में तेजी आई है और कई अन्य स्थानीय नागरिक भी इस पुनीत कार्य के लिए अपनी भूमि दान करने की इच्छा जता रहे हैं।

सांस्कृतिक आयाम और भविष्य की संभावनाएं: शांतिपुर का नया गौरव

हुगली नदी के तट पर स्थित शांतिपुर का यह क्षेत्र अपनी कीर्तन संस्कृति के लिए जाना जाता है। ‘बंगाली राम मंदिर’ के निर्माण से यहाँ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आलोचक इसे राज्य की मौजूदा मंदिर-मस्जिद की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन स्थानीय निवासी और ट्रस्ट के सदस्य इसे बंगाल की खोई हुई विरासत की वापसी मान रहे हैं। स्थानीय नागरिक सुमन बैनर्जी के अनुसार, पूरा शांतिपुर इस प्रोजेक्ट के साथ खड़ा है क्योंकि यह उनकी अपनी रामायण और अपने ‘बंगाली राम’ की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यदि सरकार इस परियोजना में सहयोग करती है, तो ट्रस्ट उसका स्वागत करेगा, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य इस ऐतिहासिक कस्बे को एक आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र में तब्दील करना है।

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