Ram Rajya Flag
Ram Rajya Flag: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के ‘शिखर’ पर भगवा ध्वज के विधिवत आरोहण का ऐतिहासिक समारोह संपन्न हुआ। इस गौरवशाली अवसर पर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को मंदिर के शिखर पर फहराए गए भगवा ध्वज का एक प्रतिकृति और रामलला की मूर्ति के लघु मॉडल भेंट कर आभार व्यक्त किया। यह समारोह उन लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान की पराकाष्ठा था, जिन्होंने राम मंदिर के सपने को साकार करने के लिए वर्षों तक इंतजार किया।
आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस ऐतिहासिक दिन को सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया और मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले असंख्य लोगों के बलिदान को याद किया।
बलिदानियों का स्मरण: उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। असंख्य लोगों ने एक सपना देखा, असंख्य लोगों ने प्रयास किए और असंख्य लोगों ने बलिदान दिया। उनकी आत्माएं आज तृप्त हुई होंगी।”
दिग्गजों को श्रद्धांजलि: भागवत जी ने विशेष रूप से अशोक सिंघल, महंत रामचंद्र दास जी महाराज, विष्णु हरि डालमिया और अनगिनत संतों, छात्रों और पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों को याद किया, जिन्होंने अपना जीवन न्योछावर किया और कड़ी मेहनत की।
शास्त्रीय प्रक्रिया की पूर्णता: उन्होंने कहा कि मंदिर अब बन गया है और आज मंदिर की ‘शास्त्रीय प्रक्रिया’ (धार्मिक अनुष्ठान) पूरी की गई है और ध्वजारोहण किया गया है।
भागवत जी का संबोधन उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिनकी अथक प्रयासों से यह सपना साकार हुआ है।
मोहन भागवत ने इस ध्वजारोहण को केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि राम राज्य के पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।उन्होंने घोषणा की, “राम राज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और दुनिया में शांति एवं समृद्धि फैलाता था, आज अपने ‘शिखर’ पर विराजमान हो गया है और हमने इसे होते हुए देखा है।”सरसंघचालक ने इस लंबी यात्रा की ओर इशारा करते हुए कहा कि ध्वज एक प्रतीक है, और मंदिर को बनने में लंबा समय लगा। उन्होंने कहा, “अगर आप 500 साल को भी अलग रख दें, तो भी 30 साल तो लगे ही।”यह बयान उन सभी वर्षों के संघर्ष और दृढ़ संकल्प को रेखांकित करता है जो इस भव्य मंदिर के निर्माण में लगा है।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने ध्वज के लिए उपयोग किए गए कचनार वृक्ष का भी प्रतीकात्मक रूप से उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि कचनार का पेड़, जो हर तरह से उपयोगी होता है, यहाँ ध्वजदंड के लिए इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने इसे ‘धर्म जीवन’ (धार्मिक जीवन) की तरह बताया।
जीवन का आदर्श: भागवत जी ने संदेश दिया, “धर्म जीवन भी एक ऐसा ही जीवन है। हमें ऐसा ही जीवन जीना है और इस जीवन के ध्वज को इसके शिखर तक ले जाना है, स्थिति चाहे जो भी हो, कितनी भी कठिन क्यों न हो…”
कर्तव्य की भावना: उन्होंने सूर्य भगवान का उदाहरण देते हुए कहा कि सूर्य हर दिन बिना थके पूर्व से पश्चिम तक जाते हैं, क्योंकि किसी का कर्तव्य केवल स्वामित्व की भावना से ही पूरा होता है। यह संदेश निस्वार्थ सेवा और कर्तव्य परायणता को प्रोत्साहित करता है।
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