Ramgopal Mishra Murder Case
Ramgopal Mishra Murder Case: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पिछले वर्ष हुए रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मंगलवार को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया है। इस जघन्य हिंसा के मामले में कुल 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी सरफराज को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है, जबकि इस मामले में दोषी करार दिए गए 9 अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले को सांप्रदायिक तनाव और हिंसा से जुड़े मामलों में एक कठोर और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बहराइच की कोर्ट ने मंगलवार, 9 दिसंबर को जिन 10 व्यक्तियों को दोषी ठहराया, उनमें अब्दुल हमीद और उसके तीन बेटे भी शामिल थे। हालांकि, लेख में विरोधाभास है कि ‘मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद सहित 10 लोग दोषी करार हुए हैं’ और आगे ‘मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई है’। कोर्ट के अंतिम निर्णय के अनुसार, जिन 10 लोगों को सजा सुनाई गई, उनमें शामिल हैं:अब्दुल हमीद,फहीम,सरफराज (मुख्य आरोपी, फांसी की सजा),तालिब,सैफ,जावेद खान,जिशान,ननकऊ,शोएब,मारुफ अली दोषियों में अब्दुल हमीद और उसके बेटों के अलावा छह अन्य लोग शामिल हैं। सजा के ऐलान के बाद मृतक रामगोपाल मिश्रा के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
इस मामले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उन पर मुकदमा चल रहा था। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के अभाव या अन्य कानूनी कारणों के चलते, अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया। जिन्हें कोर्ट ने बरी किया, उनके नाम हैं:शकील अहमद, बबलू अफजल उर्फ कल्लू, खुर्शीद इन तीन व्यक्तियों को दोषमुक्त करने का फैसला मंगलवार को सुनाया गया था, जब कोर्ट ने 10 अन्य को दोषी ठहराया था।
यह सनसनीखेज वारदात पिछले साल 13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हिंसक झड़प के बीच हुई थी। इसी दौरान रामगोपाल मिश्रा को गोली मारकर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया था। घटना के बाद, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद, 11 जनवरी 2025 को अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
इस बहुचर्चित मामले में कुल 12 गवाहों ने अदालत में अपनी गवाही दी, जो इस पूरे न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयानों का गहन अध्ययन करने के बाद, जज ने 21 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद, बीते मंगलवार, 9 दिसंबर को कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराने और तीन को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।
फैसला आने से ठीक पहले, मृतक रामगोपाल मिश्रा के बड़े भाई ने मीडिया के सामने अपने दर्द और अपनी आपबीती सुनाई थी। उन्होंने बताया, “मुझे जैसे ही पता चला कि मेरा छोटा भाई घायल हो गया है, मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। लेकिन वहां मुझ पर भी लाठियों, रॉड और धारदार हथियारों से हमला किया गया। मेरे सिर, हाथ पर गंभीर चोटें आईं और मेरी आंख पर भी असर पड़ा।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके सामने ही उनकी गाड़ी को आग लगा दी गई थी। बड़े भाई ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें आज तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है और न ही किसी ने उनका हालचाल पूछा है। साथ ही, उन्होंने दोषमुक्त किए गए लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि “असली गुनहगार अभी भी आजाद हैं, उन्हें रिहा कर दिया गया है।”
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