Red Coral Kukri Snake
Red Coral Kukri Snake : पूरी दुनिया में सांपों की हजारों अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कई बेहद जहरीली और जानलेवा होती हैं। हालांकि, इन सबके बीच कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं जो अपने अनोखे रंग और दुर्लभता के कारण पूरी दुनिया के वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। इन्हीं में से एक बेहद अनोखा और दुर्लभ जीव है ‘रेड कोरल खुकरी सांप’, जिसे आम बोलचाल की भाषा में लाल मूंगा सांप भी कहा जाता है।
यह सांप संसार की सबसे दुर्लभ सरीसृप प्रजातियों में शुमार है, यही वजह है कि यह सामान्य तौर पर इंसानी बस्तियों या आम जंगलों में कभी दिखाई नहीं देता। कई दशकों के लंबे अंतराल के बाद यह सांप दुनिया के गिने-चुने घने जंगलों में अचानक प्रकट होता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, आम धारणा के विपरीत यह चमकीला लाल सांप जहरीला नहीं होता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दिन के समय पूरी तरह सुस्त रहता है और रात होते ही शिकार के लिए अत्यधिक सक्रिय और फुर्तीला हो जाता है।
इस अति-दुर्लभ लाल मूंगा खुकरी सांप का इतिहास भारत के जंगलों से बहुत पुराना और दिलचस्प रहा है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस प्रजाति को पहली बार साल 1936 में उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में देखा गया था। उसके बाद यह सांप अचानक जैसे कहीं गायब हो गया और दशकों तक इंसानों को इसकी कोई झलक नहीं मिली। करीब 80 साल के एक लंबे और सूखे इंतजार के बाद, कुछ साल पहले इस दुर्लभ प्रजाति को एक बार फिर दुधवा टाइगर रिजर्व में रेंगते हुए देखा गया, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को हैरत में डाल दिया।
तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक ने इस महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि करते हुए बताया था कि दक्षिण सुनारीपुर रेंज के वन क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के नजदीक पटरियों पर इस चमकदार लाल सांप को देखा गया था। इतने सालों बाद इसका दोबारा दिखना इस बात का प्रमाण है कि इन जंगलों का पारिस्थितिकी तंत्र आज भी इस दुर्लभ जीव के अनुकूल बना हुआ है।
इस बेहद खास और दुर्लभ गैर-विषैले सांप की शारीरिक संरचना इसे दुनिया के अन्य सभी सांपों से बिल्कुल अलग और आकर्षक बनाती है। इस सांप का पूरा शरीर गहरे और बेहद चमकदार मूंगे जैसे लाल रंग का होता है, जो अंधेरे में भी आसानी से चमकता है। इसके नाम के पीछे एक बेहद दिलचस्प वजह छिपी है; दरअसल इस सांप के मुंह के भीतर मौजूद दांतों की बनावट नेपाल के पारंपरिक हथियार ‘खुकरी’ की तरह नुकीली और अंदर की तरफ घुमावदार होती है, इसी वजह से इसे ‘खुकरी स्नेक’ नाम दिया गया है।
चूंकि यह पूरी तरह से विषहीन होता है, इसलिए यह अपने शिकार को डसने के बजाय अपने इन्हीं घुमावदार दांतों की मदद से जकड़ता है। यह मुख्य रूप से छोटे कीड़े-मकोड़ों, छिपकलियों, मेंढकों और अन्य छोटे जीवों को अपना निवाला बनाता है।
दुनिया का यह अत्यंत दुर्लभ वन्यजीव मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ विशेष भौगोलिक और हिमालयी क्षेत्रों में ही निवास करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अनूठा सांप उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों, नेपाल के घने जंगलों, उत्तर प्रदेश के तराई वन भागों, बिहार, पश्चिम बंगाल और हिमालय की तलहटी में बसे वनों में पाया जाता है। दिन के समय घनी झाड़ियों, सूखी पत्तियों या मिट्टी के नीचे छिपे रहने के कारण इसे देख पाना नामुमकिन के बराबर होता है।
अपनी इसी रहस्यमयी जीवनशैली और लगातार घटती संख्या के कारण, इस सांप को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह से संरक्षित जीवों की श्रेणी में रखा गया है। पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दुर्लभ लाल मूंगा खुकरी सांप का किसी भी जंगल में पाया जाना वहां के समृद्ध और स्वस्थ पर्यावरण का एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संकेत माना जाता है।
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