Ratlam Violence: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां प्रशासन की एक कार्रवाई के दौरान भारी बवाल हो गया। शिवगढ़ क्षेत्र के पास अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई, जिसने देखते ही देखते एक हिंसक मोड़ ले लिया। दोनों पक्ष इस कदर आमने-सामने आ गए कि हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए।

बेकाबू भीड़ और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को न केवल प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा, बल्कि स्थिति को संभालने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। इस पूरे हिंसक घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके से 40 से अधिक उपद्रवियों और प्रदर्शनकारियों को अपनी हिरासत में ले लिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव का माहौल व्याप्त है और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

प्रशासनिक टीम पर पथराव से बिगड़े हालात, मौके पर मची अफरा-तफरी
यह पूरा विवाद रतलाम के पलसोड़ी इलाके में शुक्रवार को उस समय अचानक शुरू हुआ, जब जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंची थी। प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगते ही वहां बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रभावित लोग इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का पुरजोर और संगठित तरीके से विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप धारण कर लिया और भीड़ में शामिल कुछ शरारती तत्वों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पर अचानक भारी पथराव शुरू कर दिया। पत्थरों की बौछार होते ही घटना स्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के वाहन और प्रशासनिक अमला खुद को बचाने के लिए पीछे हटने लगा, जिससे हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर चले गए।
पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए किया लाठीचार्ज और दागे आंसू गैस के गोले
जमीनी स्तर पर बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था और हिंसक होती भीड़ को संभालने के लिए तैनात पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में बेहद संयम का परिचय दिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को समझाने-बुझाउने और शांत रहने की लगातार कोशिश की, लेकिन उग्र हो चुकी भीड़ पर इसका कोई असर नहीं हुआ और पथराव लगातार जारी रहा। जब बातचीत और समझाइश से बात नहीं बनी, तो पुलिस ने आत्मरक्षार्थ और कानून का इकबाल बुलंद रखने के लिए सख्ती बरतने का फैसला किया। पुलिस के जवानों ने उग्र भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले छोड़े गए। इस पूरे पथराव और हिंसक झड़प के दौरान तीन पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जुलवानिया के सरपंच सहित 40 से ज्यादा उपद्रवी पुलिस हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान हुए हिंसक बवाल और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। हालात पर काबू पाते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिंसा भड़काने और कंक्रीट-पत्थर फेंकने के आरोप में 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपियों में जुलवानिया ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच छोटू मईडा भी शामिल हैं, जिन पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए यह दंडात्मक कार्रवाई अत्यंत आवश्यक थी। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है।
प्रस्तावित निवेश क्षेत्र का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं ग्रामीण
इस पूरे हिंसक विरोध प्रदर्शन की जड़ में जमीन का एक बड़ा विवाद शामिल है। स्थानीय ग्रामीण और किसान पिछले काफी लंबे समय से अपनी जमीनों को सरकार के प्रस्तावित निवेश क्षेत्र (इन्वेस्टमेंट जोन) में शामिल किए जाने की योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना, पर्याप्त समय दिए और बिना उनकी मर्जी व सहमति के यह एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी बात रखने के लिए प्रशासन से कुछ दिनों का समय मांगा था। इसके साथ ही, इस पूरे संवेदनशील भूमि अधिग्रहण मामले को लेकर ग्रामीणों की तरफ से माननीय हाई कोर्ट में एक स्थगन आवेदन (स्टे पिटिशन) भी लगाया गया है, जिस पर फैसला आना अभी बाकी है।
प्रशासन का दावा: पूरी कार्रवाई शासकीय भूमि पर नियमों के तहत की गई
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों का रुख पूरी तरह साफ और कड़ा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिस जमीन को औद्योगिक निवेश क्षेत्र के विकास के लिए चिन्हित किया गया है, वह पूरी तरह से शासकीय (सरकारी) भूमि है और इस पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना से प्रभावित होने वाले वैध लोगों के पुनर्वास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए सरकार द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरी बेदखली प्रक्रिया कानून के दायरे में और तय नियमों के तहत ही की जा रही थी, लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों ने राजनीतिक लाभ के लिए ग्रामीणों को भड़काकर इस सरकारी कार्य में हिंसक बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की।
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