RBI MPC Meeting 2026
RBI MPC Meeting 2026 : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के परिणामों की घोषणा करेंगे। बुधवार से शुरू हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में देश की आर्थिक सेहत और भविष्य की नीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई है। इस बार की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हाल ही में पेश हुए विकासोन्मुखी आम बजट और ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई है। बाजार को उम्मीद है कि इन फैसलों से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ का भी सटीक आकलन हो सकेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस बार ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है। अधिकांश जानकारों का अनुमान है कि रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई में फिलहाल कोई बदलाव होने की संभावना कम है। चूंकि वर्तमान में मुद्रास्फीति (Inflation) नियंत्रण में है और विकास दर के संकेतक सकारात्मक हैं, इसलिए केंद्रीय बैंक दरों के साथ छेड़छाड़ करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगा।
बीओएफए (BofA) ग्लोबल रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का दर कटौती चक्र अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद विकास दर को लेकर अनिश्चितता कम हुई है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का एक धड़ा अब भी मान रहा है कि उधारी लागत कम करने के लिए एक अंतिम छोटी कटौती की गुंजाइश बन सकती है, लेकिन बहुमत दरों के स्थिर रहने के पक्ष में है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि दरें स्थिर रखने के बावजूद आरबीआई बाजार में नकदी (Liquidity) के प्रवाह को संतुलित बनाए रखने के लिए अन्य उपायों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
साल 2025 कर्ज लेने वालों के लिए काफी राहत भरा रहा था। पिछले वर्ष आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की बड़ी कटौती की थी।
फरवरी और अप्रैल 2025: शुरुआती दौर में 0.25-0.25 प्रतिशत की दो कटौतियां हुईं।
जून 2025: सबसे बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को एक साथ 0.50 प्रतिशत कम किया था।
दिसंबर 2025: साल के अंत में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत की कटौती कर रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत के स्तर पर लाया गया।
इस बार की एमपीसी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत का वैश्विक व्यापारिक कद बढ़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे घरेलू बाजार में मजबूती देखी जा रही है। बजट में बुनियादी ढांचे पर किए गए खर्च के वादों ने भी आरबीआई को रेपो रेट पर कड़ा रुख न अपनाकर लचीला बने रहने का मौका दिया है। यदि आज दरें स्थिर रहती हैं, तो यह संकेत होगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब बाहरी झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह सक्षम है और उसे कृत्रिम प्रोत्साहन की कम आवश्यकता है।
अगर आरबीआई आज ब्याज दरों में बदलाव नहीं करता है, तो बैंकों द्वारा भी लोन की दरों में वृद्धि की संभावना नहीं होगी। बचतकर्ताओं के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरें भी स्थिर बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, यह स्थिरता का संकेत है जो लंबे समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। अब से कुछ ही घंटों में गवर्नर संजय मल्होत्रा के आधिकारिक बयान से पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
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