Reheating Leftover Rice
Reheating Leftover Rice: अक्सर भारतीय घरों में दोपहर या रात के खाने के बाद चावल बच जाते हैं। अधिकांश लोग इन्हें बासी समझकर फेंक देते हैं या फिर बेमन से खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सही तरीके से स्टोर किए गए बचे हुए चावल न केवल खाने के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि आपकी सेहत को अद्भुत लाभ भी पहुँचा सकते हैं? यूके के प्रसिद्ध सर्जन और हेल्थ इन्फ्लुएंसर डॉ. करण राजन ने हाल ही में साझा किया कि बासी चावलों को लेकर डरने की जरूरत नहीं है, बशर्ते आप उन्हें सहेजने का सही तरीका जानते हों।
डॉ. करण राजन के अनुसार, कच्चे चावलों में ‘बैसिलस सीरियस’ (Bacillus cereus) नामक बैक्टीरिया के स्पोर्स हो सकते हैं। ये स्पोर्स इतने जिद्दी होते हैं कि चावल पकने के बाद भी जीवित रह सकते हैं। यदि पके हुए चावलों को कई घंटों तक रसोई के सामान्य तापमान पर खुला छोड़ दिया जाए, तो ये बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं और जहरीले तत्व पैदा करते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, चावलों को लंबे समय तक बाहर रखना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
चावलों को सुरक्षित रखने के लिए डॉ. राजन ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं:
त्वरित कूलिंग: चावल पकने के 1 से 2 घंटे के भीतर उन्हें फ्रिज में रख देना चाहिए।
छोटे कंटेनर्स का उपयोग: यदि चावल अधिक मात्रा में हैं, तो उन्हें बड़े बर्तन के बजाय छोटे एयरटाइट कंटेनर्स में बांट लें। इससे वे जल्दी ठंडे होते हैं।
तापमान का ध्यान: चावलों को फ्रिज में 4°C या उससे कम तापमान पर स्टोर करना चाहिए। इस विधि से रखे गए चावल 3 से 6 दिनों तक खाने योग्य रहते हैं।
फ्रिज से निकले चावलों को दोबारा गर्म करना भी एक कला है। डॉ. राजन सलाह देते हैं कि चावलों को तब तक गर्म करें जब तक कि उनका आंतरिक तापमान 74°C तक न पहुँच जाए। इससे हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। एक विशेष बात यह है कि चावलों को केवल एक ही बार दोबारा गर्म करना चाहिए; बार-बार गर्म करने से उनकी गुणवत्ता खत्म हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
हैरानी की बात यह है कि ताजे चावलों की तुलना में ठंडे किए गए चावल अधिक पौष्टिक हो सकते हैं। डॉ. राजन बताते हैं कि जब चावल ठंडे होते हैं, तो उनमें ‘रेज़िस्टेंट स्टार्च’ (Resistant Starch) का निर्माण होता है। यह एक प्रकार का फाइबर है जिसे हमारा शरीर जल्दी नहीं पचा पाता। यह स्टार्च सीधे बड़ी आंत में पहुँचता है और वहाँ मौजूद ‘गुड बैक्टीरिया’ (प्रोबायोटिक्स) के लिए भोजन का काम करता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है।
रेज़िस्टेंट स्टार्च के कारण बासी चावलों का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ कम हो जाता है। इसका मतलब है कि इन्हें खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल एकदम से नहीं बढ़ता। इसके अलावा, ये चावल पेट को अधिक समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या डायबिटीज को मैनेज कर रहे हैं, उनके लिए संतुलित मात्रा में सही तरीके से स्टोर किए गए बासी चावल एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।
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