Republic Day 2026
Republic Day 2026: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गुजरात राज्य अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का शानदार प्रदर्शन करने जा रहा है। इस वर्ष गुजरात की झांकी का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की निर्माण यात्रा है। यह झांकी न केवल तिरंगे के बदलते स्वरूप को दर्शाएगी, बल्कि उन क्रांतिकारी मंत्रों को भी जीवंत करेगी जिन्होंने भारतीयों के दिलों में स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक ऐसा मंत्र है जिसने राष्ट्र की चेतना को एकजुट किया।
झांकी के अग्र हिस्से में नवसारी, गुजरात की वीर बेटी मैडम भीकाजी कामा की एक भव्य प्रतिमा प्रदर्शित की गई है। उनके हाथों में वह ऐतिहासिक ध्वज है जिसे उन्होंने 1907 में पहली बार पेरिस की विदेशी धरती पर फहराया था। इस ध्वज की विशेषता इस पर अंकित ‘वंदे मातरम’ शब्द हैं। यह वही ध्वज है जिसे जर्मनी के स्टटगार्ट में आयोजित ‘इंडियन सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस’ में फहराकर दुनिया को भारत की आजादी का संदेश दिया गया था। मैडम कामा की अर्ध-प्रतिमा के नीचे भारत के संविधान में सूचीबद्ध सभी भाषाओं में ‘वंदे मातरम’ लिखकर देश की भाषाई विविधता और एकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया है।
झांकी का मध्य भाग राष्ट्रीय ध्वज के क्रमिक विकास की कहानी कहता है। इसकी शुरुआत 1906 में कोलकाता के पारसी बागान से होती है, जहाँ पहली बार वंदे मातरम अंकित झंडा फहराया गया था। इसके बाद 1917 में डॉ. एनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक के होमरूल आंदोलन का ध्वज और 1921 में विजयवाड़ा में पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया वह ध्वज दिखाया गया है जिसे उन्होंने महात्मा गांधी को भेंट किया था। 1931 में तिरंगे के केंद्र में चरखे को स्थान मिला, जिसे अंततः 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान स्वरूप में स्वीकार किया, जहाँ चरखे का स्थान अशोक चक्र (धर्म चक्र) ने लिया।
झांकी के अंतिम हिस्से में महात्मा गांधी के शिल्प को एक विशाल धर्म चक्र के साथ दर्शाया गया है। यह हिस्सा गांधी जी के स्वदेशी और स्वावलंबन के दर्शन को आधुनिक भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान से जोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत उन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है जिनका सपना राष्ट्रपिता ने देखा था। झांकी के साथ चल रहे कलाकार राष्ट्रीय शायर झवेरचंद मेघाणी द्वारा रचित प्रसिद्ध गीत ‘कसुंबी नो रंग’ की धुन पर लोक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर रहे हैं।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां हिस्सा ले रही हैं, जिनमें 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों की 13 झांकियां शामिल हैं। 77वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा उपस्थित रहेंगे। गुजरात की इस झांकी का निर्माण सूचना सचिव डॉ. विक्रांत पांडे और सूचना आयुक्त किशोर बचाणी के कुशल मार्गदर्शन में किया गया है, जो वैश्विक मंच पर गुजरात की अटूट देशभक्ति का परिचय देगी।
Read More: Farmers Income: भारतीय किसानों की आय और कर्ज के आंकड़े, झारखंड सबसे नीचे, एमपी भी बेहाल
IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का बिगुल बज चुका है और कोलकाता नाइट…
Tulsi Gabbard Warning: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर…
UAE Eid ul Fitr 2026: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इस वर्ष ईद उल फितर…
X Services Down: सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी और एलन मस्क के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म…
Shivam Dube Train Journey: न्यूजीलैंड को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हराकर टी20 वर्ल्ड…
Assam Assembly Election: असम विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन…
This website uses cookies.