Republic Day
Republic Day 2026: देश के 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ओवैसी द्वारा तिरंगा फहराए जाने की इस घटना पर राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ओवैसी की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि ओवैसी का झंडा फहराना केवल ‘राष्ट्रवादी होने का ढोंग’ है। उन्होंने तर्क दिया कि ओवैसी वही व्यक्ति हैं जो स्वतंत्रता आंदोलन के मूल मंत्र “वंदे मातरम्” का निरंतर विरोध करते रहे हैं।
सिंह के अनुसार, जो व्यक्ति राष्ट्र के मूल प्रतीकों और नारों का सम्मान नहीं करता, उसे तिरंगा फहराने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रभक्ति कोई दिखावे की वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा भाव है जो व्यक्ति के आचरण में स्वतः परिलक्षित होना चाहिए।
गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर केवल सार्वजनिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि कई केंद्रीय मंत्रियों ने अपने आवास पर भी तिरंगा फहराकर संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने आवास पर ध्वजारोहण किया और समस्त देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मीडिया से संवाद करते हुए उन्होंने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताया।
चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत ‘जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए’ के सिद्धांत पर चलते हुए निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे एक गौरवशाली, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। चौहान ने इस बात पर विशेष बल दिया कि हमें मिलकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लेना चाहिए ताकि वैश्विक पटल पर देश की शक्ति और बढ़ सके।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और 1950 की ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण किया। सीएम योगी ने कहा कि 26 जनवरी वह दिन है जब भारत का संविधान औपचारिक रूप से लागू हुआ और देश एक पूर्ण गणराज्य बना। उन्होंने पिछले 76 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान ने समय के साथ कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन इसकी मूल भावना हमेशा अडिग रही है। योगी ने कहा कि आज हम जो ‘नया भारत’ देख रहे हैं, वह हमारे संविधान की ही देन है।
यह संविधान ही है जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हर भारतीय के गौरव और देश की एकता को सुरक्षित रखता है। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की अहम भूमिका के कारण ही देश अखंडता के साथ आगे बढ़ रहा है।
77वां गणतंत्र दिवस जहां एक ओर देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता के प्रदर्शन का गवाह बना, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर नई बहस भी देखने को मिली। एक तरफ मंत्रियों ने विकसित भारत और आत्मनिर्भरता का रोडमैप साझा किया, तो दूसरी तरफ प्रतीकों के सम्मान को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। कुल मिलाकर, यह दिन भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और संविधान के प्रति जन-जन की आस्था को प्रकट करने वाला रहा।
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