Revanth Reddy Big Statement: NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पश्चात देश की राजनीति में लगातार नई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का कोई युवा नेता केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाले। उनका कहना था कि हालिया छात्र आंदोलन ने देश के युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को नई पहचान दी है।

युवाओं को संसद तक पहुंचाने की बात कही
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रेवंत रेड्डी ने कहा कि सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद करने वाले युवाओं की भूमिका केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार, जिन युवाओं ने विभिन्न मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी है, उन्हें आगे चलकर संसद और नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर इंडिया गठबंधन के नेताओं से चर्चा करेंगे और सभी दलों से आग्रह करेंगे कि युवाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

जेन-जी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर अवसर देने की वकालत
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी नई सोच, तकनीकी समझ और सामाजिक बदलाव की आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रही है। उनका मानना है कि यदि युवाओं को निर्णय लेने वाली जिम्मेदारियों में स्थान मिलेगा, तो शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में नई सोच और सुधार देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेन-जी की आवाज केवल विरोध प्रदर्शनों तक सीमित न रहकर संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंचनी चाहिए, ताकि उनकी भागीदारी राष्ट्रीय नीतियों में भी दिखाई दे।
चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु घटाने की मांग
रेवंत रेड्डी ने चुनावी सुधारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है, लेकिन इसे घटाकर 21 वर्ष किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, आज के युवा कम उम्र में ही सामाजिक और राजनीतिक विषयों की अच्छी समझ रखते हैं, इसलिए उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जल्दी भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि तेलंगाना सरकार इस विषय पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पारित करने की तैयारी कर रही है, जिसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
कैंडल मार्च में युवाओं की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने यह बयान NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर आयोजित एक कैंडल मार्च के दौरान दिया। इस कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, कई मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा शामिल हुए। कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया गया। वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर भी बल दिया।
आंदोलन को लेकर राजनीतिक टिप्पणी
अपने संबोधन में रेवंत रेड्डी ने हालिया छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी और व्यापक जनसमर्थन हासिल किया। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की एकजुटता ने राजनीतिक नेतृत्व को महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं की भूमिका पर बढ़ी चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में छात्र राजनीति, परीक्षा सुधार और युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। रेवंत रेड्डी का बयान भी इसी बहस का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं को केवल आंदोलनकारी नहीं बल्कि भविष्य के नीति-निर्माता और नेतृत्वकर्ता के रूप में देखने की बात कही। उनका कहना है कि यदि युवाओं को समय रहते अवसर दिए जाएं, तो वे देश की शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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