Indian prisoners abroad: विदेश मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि वर्तमान में दुनिया के 11 देशों में कुल 43 भारतीय नागरिक मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, 70 से अधिक देशों की जेलों में कुल 10,574 भारतीय नागरिक बंद हैं। इन कैदियों में कुछ अंडरट्रायल हैं, कुछ सजा भुगत रहे हैं, तो कुछ अपनी सजा पूरी कर रिहाई या प्रत्यर्पण का इंतजार कर रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, 14 ऐसे देश हैं जहां 100 से अधिक भारतीय जेलों में बंद हैं।

मौत की सजा झेल रहे भारतीय
मौत की सजा का सामना कर रहे भारतीयों में सबसे अधिक संख्या संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में है, जहां 21 भारतीय मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। इसके बाद सऊदी अरब में 7, चीन में 4, इंडोनेशिया में 3, यमन में 1 और अन्य देशों में भी कुछ मामले हैं।

विदेशी जेलों में भारतीय कैदियों की संख्या में वृद्धि
विदेश मंत्रालय ने बताया कि पिछले दस वर्षों में विदेशी जेलों में बंद भारतीय कैदियों की संख्या में लगभग 63% की वृद्धि हुई है। साल 2016 में 6,489 भारतीय विदेशों में जेलों में थे, जो बढ़कर 2025 में 10,574 हो गए हैं।
विशेष रूप से खाड़ी देशों में कैद भारतीयों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। 2016 में खाड़ी देशों में 3,266 भारतीय कैदी थे, जो अब बढ़कर 6,671 हो चुके हैं। इनमें सऊदी अरब में 1,653, यूएई में 838, कुवैत में 459, कतर में 139, ओमान में 109 और बहरीन में 68 भारतीय कैदी शामिल हैं।
श्रीलंका में फंसे 28 भारतीय मछुआरे
श्रीलंका की जेलों में 15 जुलाई 2025 तक 28 भारतीय मछुआरे बंद हैं। यह मुद्दा सरकार द्वारा लगातार श्रीलंका के साथ मानवीय आधार और आजीविका संरक्षण के लिए उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में श्रीलंका के राष्ट्रपति से इस विषय पर चर्चा की है।
कैदियों को मिलने वाली सहायता
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार विदेशों में बंद भारतीय कैदियों को कानूनी सहायता, काउंसलर एक्सेस और समय पर रिहाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके साथ ही, कई देशों के साथ कैदी स्थानांतरण संधियां भी की गई हैं, ताकि कैदियों को उनकी मर्जी से भारत लाया जा सके। सरकार ने यह भी बताया कि इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) सक्रिय है, जो विदेशों में फंसे जरूरतमंद भारतीय कैदियों को आर्थिक और अन्य सहायता प्रदान करता है।
जानकारी में कमी का कारण
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि कई देशों के कड़े प्राइवेसी कानूनों के चलते सभी मामलों की विस्तृत जानकारी देना संभव नहीं होता। कई बार तब तक जानकारी साझा नहीं की जाती जब तक संबंधित कैदी या उसके परिवार की अनुमति न मिल जाए।
विदेशों में भारतीय नागरिकों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। खासकर मौत की सजा झेल रहे 43 भारतीयों की स्थिति सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन लगातार इन कैदियों की मदद और रिहाई के लिए सक्रिय हैं। साथ ही, खाड़ी देशों सहित कई देशों में बढ़ते भारतीय कैदियों की संख्या को कम करने के उपाय भी किए जा रहे हैं।
Read More : India Pakistan partition: भारत-पाक बंटवारा: आजादी की सुबह, बंटवारे की पीड़ा – एक ऐतिहासिक पड़ताल










