Pratappur News : प्रतापपुर-चंदौरा मार्ग में हुए घटिया निर्माण की जांच कराने अनुविभाग स्तरीय जनदर्शन में शिकायत दी गई है। शिकायत में घटिया निर्माण के कारण बनने के कुछ माह बाद से ही टूट रहे मार्ग की विभिन्न बिंदुओं पर वृहद जांच करने मांग की गई है।

जिनमें सड़क के एस्टीमेट और डीपीआर में मौजूद प्रावधानों के अनुसार कार्य हुए हैं या नहीं, बेस कौन सी सामग्री से बनना था, निर्माण से पूर्व मार्ग कितनी खुदाई होनी थी कितनी की गई, डामर के लेयर की कितनी मोटाई होनी थी कितनी की गई, कितने पुल पुलियों का निर्माण होना था कितने किए गए सहित अन्य आवश्यक बिंदुओं पर वृहद जांच की आवश्यकता बताई गई है।


इस संबंध में प्रतापपुर के सामाजिक कार्यकर्ता व शिकायकर्ता दीपक चंद मित्तल ने बताया कि 7.20 किलोमीटर लंबे प्रतापपुर-चंदौरा मार्ग का 11 करोड़ 50 लाख 61 हजार की लागत से पीडब्ल्यूडी संभाग रामानुजगंज के उप संभाग वाड्रफनगर ने ठेकेदार के माध्यम से किया था। विभाग द्वारा ठेकेदार से मार्ग निर्माण के संबंध में किए गए अनुबंध में मार्ग की गुणवत्ता पांच वर्ष तक बनी रहने की गारंटी दी गई थी। पर मार्ग बनने के साथ ही उसके किनारे के हिस्से दबने शुरू हो गए थे। अब स्थिति यह है कि मार्ग कई जगहों से उखड़ चुका है। गड्ढे भी हो गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मार्ग का नवीनीकरण कार्य तय मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
करोड़ों की लागत वाले मार्ग में जानबूझकर गुणवत्ता की अनदेखी की गई। ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत ने मार्ग के निर्माण में व्यापक अनियमितता बरती। शिकायतकर्ता ने कहा कि अब विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से मार्ग की मरम्मत कराने की बात कही जा रही है। मरम्मत तो हो जाएगी पर सवाल यह उठता है कि गारंटी अवधि में ही उखड़ रहे मार्ग के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होगी या सिर्फ मरम्मत की लीपापोती कर मामला रफा दफा कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रतापपुर-चंदौरा मार्ग का करोड़ों की लागत से निर्माण किसी व्यक्ति विशेष की कृपा से नहीं बल्कि जनता द्वारा अपने खून पसीने की कमाई से सरकार को दिए गए टैक्स की बदौलत हुआ है। इसलिए मार्ग की जांच कर इसकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठेकेदार व अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
मार्ग की स्थिति को लेकर पूर्व में भी हुए हैं समाचार प्रकाशित
बता दें कि बनने के कुछ माह बाद से ही उखड़ रहे प्रतापपुर-चंदौरा मार्ग की स्थिति को लेकर इससे पूर्व भी समाचार प्रकाशित किए गए थे। बावजूद इसके मार्ग में हुई अनियमितता के मामले में अब तक कोई जांच नहीं हो सकी है। जांच न होने से लोगों में खासा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि दशकों की जद्दोजहद के बाद मार्ग का नवीनीकरण हुआ था पर कमीशनखोरी के लालच ने मार्ग का बेड़ा गर्क कर दिया है। इस तरह से जनता के पैसों का दुरूपयोग करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।











