RSS Ban Demand : धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाले अमेरिकी आयोग US Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों में शामिल भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की अपील की है। USCIRF का कहना है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर लगातार चिंताएं सामने आती रही हैं।
USCIRF चेयर आसिफ महमूद ने अमेरिकी सरकार से की मांग
USCIRF के पाकिस्तानी मूल के चेयरपर्सन आसिफ महमूद ने बुधवार को जारी बयान में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि RSS से जुड़े संगठनों के सदस्यों पर ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों सहित धार्मिक एवं सामाजिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, ये USCIRF के आरोप और आकलन हैं, जिन पर भारत सरकार तथा RSS की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
मोहन भागवत का वीजा रद्द करने की भी अपील
आसिफ महमूद ने अमेरिकी प्रशासन से मोहन भागवत को जारी वीजा रद्द करने और भविष्य में अमेरिका में प्रवेश के लिए उन्हें अयोग्य घोषित करने पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में कथित तौर पर शामिल RSS सदस्यों और भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की जानी चाहिए। USCIRF का यह बयान ऐसे समय आया है जब RSS प्रमुख अमेरिका की यात्रा पर हैं और वहां भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं।
भारत सरकार की नीतियों पर भी USCIRF ने उठाए सवाल
आयोग ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर RSS की हिंदुत्व विचारधारा से मेल खाने वाली नीतियां लागू करने का आरोप लगाया। USCIRF ने दावा किया कि इन परिस्थितियों के कारण भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति में गिरावट आई है। यह पहली बार नहीं है जब USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंता जाहिर की हो। हालांकि, आयोग की सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं।
29 अगस्त को न्यूयॉर्क में कार्यक्रम करेंगे मोहन भागवत
मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित वैश्विक पहुंच अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। RSS वर्ष 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है और शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों के तहत विभिन्न देशों में गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
USCIRF क्या है और इसका काम क्या है?
USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र द्विदलीय संघीय आयोग है, जिसका प्रमुख कार्य दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करना और अमेरिकी सरकार को नीतिगत सुझाव देना है। आयोग धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट और सिफारिशें जारी करता है। हालांकि, USCIRF द्वारा की गई सिफारिशों को अमेरिकी प्रशासन के लिए अनिवार्य आदेश नहीं माना जाता। अंतिम निर्णय अमेरिकी सरकार की संबंधित संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है।
USCIRF के बयान पर सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया
USCIRF के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने आयोग के आकलन को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की। एक यूजर तनवीर ने खुद को भारतीय मुस्लिम बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में भारत की स्थिति को लेकर एकतरफा तस्वीर पेश की गई है। उन्होंने दावा किया कि देश में मुस्लिम समुदाय सार्वजनिक रूप से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है और कई मौकों पर पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है।
भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस फिर तेज
USCIRF की टिप्पणी ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ आयोग भारत में कथित धार्मिक भेदभाव और हिंसा को लेकर सवाल उठाता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके आलोचक रिपोर्टों को भारत की वास्तविक परिस्थितियों का अधूरा या पक्षपातपूर्ण आकलन बताते हैं। मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के बीच जारी यह बयान आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी बहस को और चर्चा में ला सकता है।
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