RSS Controversy : ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी KPCC के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने केरल यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक वाइस चांसलर मोहनन कुन्नुम्मल के बयान का समर्थन किया है। हरिप्रसाद ने कहा कि वाइस चांसलर ने RSS पर सही सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS के लोग न तो ‘वंदे मातरम्’ गाते हैं, न राष्ट्रगान गाते हैं और न ही तिरंगा फहराते हैं।
RSS की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से
बी.के. हरिप्रसाद ने अपने बयान में RSS की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से कर दी। उन्होंने कहा कि इन तीनों संगठनों में एक समानता है कि ये भारत में पंजीकृत संगठन नहीं हैं। कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ने की संभावना है। उनके बयान पर भाजपा और RSS की ओर से प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है, क्योंकि उन्होंने एक राष्ट्रीय संगठन की तुलना प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से की है।
सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ FIR का संदर्भ
कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। आरोप लगाया गया है कि ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के दौरान कथित तौर पर बाधा डाली गई। इस मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने मामले को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
VC मोहनन कुन्नुम्मल ने RSS कार्यक्रम में दिया बयान
केरल यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक वाइस चांसलर मोहनन कुन्नुम्मल ने शनिवार को RSS की ओर से युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम ‘संकल्प 2026’ में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संबोधन दिया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करने वाले लोगों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग राष्ट्रीय गीत के विरोध में खड़े होते हैं, उन्हें यह समझने की जरूरत है कि भारत को ‘मां’ के रूप में क्यों संबोधित किया जाता है।
‘भारत माता’ की अवधारणा पर VC ने रखी बात
अपने भाषण में कुन्नुम्मल ने कहा कि भारत के संदर्भ में ‘मां’ को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। उन्होंने ‘भारत माता’ और ‘वंदे मातरम्’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतभूमि को मां के रूप में देखा जाता है। उनके अनुसार, इसी भाव के कारण ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी मां के महत्व को समझते हैं, वे भारत माता के प्रति भी इसी सम्मान की भावना रखते हैं।
‘जो मां को नहीं जानते, वही विरोध करते हैं’
वाइस चांसलर ने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करते हैं, वे भारत को मां के रूप में देखने की भावना को नहीं समझते। उन्होंने कहा कि जो लोग मां होने के अर्थ और महत्व को समझते हैं, वे ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करेंगे। कुन्नुम्मल ने कहा कि भारत माता की अवधारणा देश की सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान से जुड़ी हुई है।
परिवार और राष्ट्र निर्माण का भी किया जिक्र
कुन्नुम्मल ने अपने संबोधन में परिवार की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत माता ने ही बच्चों को उनके माता-पिता के पास भेजा है और इन बच्चों को विकसित भारत के निर्माण के लिए तैयार करना परिवार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को बेहतर नागरिक और प्रतिभाशाली बनाने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से परिवार की महिला मुखिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज
वंदे मातरम् को लेकर सामने आए इन बयानों ने एक बार फिर राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय प्रतीकों और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर कांग्रेस नेता RSS और भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर RSS कार्यक्रम में दिए गए VC के बयान को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख पर चर्चा तेज हो गई है।
विवाद आगे और बढ़ने के आसार
FIR, कांग्रेस नेताओं के बयान और केरल यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक वाइस चांसलर की टिप्पणी के बाद मामला अब राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है। आने वाले दिनों में भाजपा, कांग्रेस और RSS की ओर से इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद राष्ट्रीय गीत, देशभक्ति और राजनीतिक विचारधारा के मुद्दे पर नई बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
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